नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की धरोहरों को संरक्षित करने तथा पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल की जा रही है। जिला प्रशासन ने पुरानी कोतवाली के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। प्रस्तावित योजना पर करीब 7 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक भवन को संरक्षित करने के साथ परिसर को आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है।
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के स्तर से तैयार की जा रही इस योजना में पुरानी कोतवाली की ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आवश्यक जीर्णोद्धार कार्य कराए जाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही पूरे परिसर को व्यवस्थित और पर्यटकों के लिए सुविधाजनक बनाने की योजना तैयार की जा रही है।
प्रस्तावित विकास कार्यों में परिसर में पार्क विकसित करने की योजना भी शामिल है। इसके अलावा स्थानीय उत्पादों और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए हाट बाजार की व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव है। शाम के समय परिसर को आकर्षक बनाने के लिए फसाड लाइटिंग की सुविधा भी विकसित की जाएगी। इन सुविधाओं के जरिए ऐतिहासिक स्थल को सार्वजनिक उपयोग और पर्यटन दोनों के लिहाज से बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
जिला प्रशासन के अनुसार इस कार्ययोजना को प्राथमिकता के आधार पर पर्यटन विभाग की कार्ययोजना में शामिल कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा। इसके पश्चात जीर्णोद्धार और निर्माण से संबंधित कार्य शुरू कराए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पुरानी कोतवाली को विकसित करने की योजना केवल भवन के सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है। इसके जरिए ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के साथ आसपास के क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। परिसर में पार्क और हाट बाजार जैसी सुविधाएं विकसित होने से स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी बेहतर वातावरण मिलने की उम्मीद है।
फसाड लाइटिंग के माध्यम से ऐतिहासिक भवन को रात के समय भी आकर्षक रूप देने की योजना है। इससे स्थल की स्थापत्य विशेषताओं को बेहतर तरीके से प्रदर्शित किया जा सकेगा। ऐतिहासिक भवन के संरक्षण के साथ आधुनिक सुविधाओं का संयोजन इसे स्थानीय पर्यटन के लिए एक नए आकर्षण के रूप में विकसित करने में मदद कर सकता है।
प्रशासन का मानना है कि ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण स्थानीय पहचान को मजबूत करने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे सकता है। यदि प्रस्तावित योजना को मंजूरी मिलती है और कार्य निर्धारित रूप से पूरा होता है, तो इससे पर्यटन से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। हाट बाजार जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और कारोबार को भी मंच मिल सकता है।
चित्रकूट पहले से ही धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में पुरानी कोतवाली जैसे ऐतिहासिक स्थल को व्यवस्थित रूप से विकसित करने की योजना जिले के पर्यटन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जिला प्रशासन का व्यापक उद्देश्य चित्रकूट की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए उन्हें आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ना है। प्रशासन की योजना स्थानीय धरोहरों को बेहतर तरीके से विकसित कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर उनकी पहचान मजबूत करने की है। पुरानी कोतवाली का प्रस्तावित जीर्णोद्धार इसी दिशा में उठाया जा रहा एक महत्वपूर्ण कदम है।
