नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस कमिश्नरेट के निर्देश पर पश्चिम जोन की साइबर सेल ने विभिन्न थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए 35 ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके बैंक खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया जा रहा था। जांच में इन खातों से करीब 30 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन होने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई को प्रदेश में साइबर अपराध के नेटवर्क पर बड़ी चोट माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी तथाकथित ‘म्यूल अकाउंट’ धारक हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इनमें से कई लोगों ने कमीशन या आर्थिक लाभ के लालच में अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा दिए थे। ठगी करने वाले गिरोह इन खातों का इस्तेमाल पीड़ितों से ठगे गए पैसे को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में भेजने, नकदी निकालने और धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए करते थे। इससे साइबर अपराधियों के नेटवर्क तक पहुंचना और धन के प्रवाह का पता लगाना कठिन हो जाता था।
यह कार्रवाई पश्चिम जोन के 10 अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों के आधार पर की गई। पुलिस ने उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार किया। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने के लिए केवल मुख्य ठगों ही नहीं, बल्कि ऐसे खाताधारकों के खिलाफ भी कार्रवाई आवश्यक है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस अपराध श्रृंखला का हिस्सा बनते हैं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 100 से अधिक शिकायतें दर्ज थीं। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने संबंधित मामलों की जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की पूछताछ में साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों और संगठित गिरोहों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही उनके बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों की भी गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन खातों के माध्यम से कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया और धनराशि किन-किन स्थानों तक पहुंचाई गई।
अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल बैंकिंग या ओटीपी जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। कमीशन या आसान कमाई के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है और इसके लिए संबंधित खाताधारक को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
