आश्रम में बातचीत के दौरान प्रेमानंद महाराज ने सबसे पहले कैलाश खेर का हाल-चाल पूछा, जिस पर गायक ने सहज भाव से कहा कि वे पूरी तरह “मस्त” हैं। इसके बाद कैलाश खेर ने माइक लेकर अपने प्रसिद्ध भजन “बम लहरी” का गायन शुरू किया। अपने खास अंदाज में उन्होंने न केवल भजन प्रस्तुत किया बल्कि भावपूर्ण नृत्य भी किया, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालु और संतगण भी भावविभोर हो उठे। यह भजन लगभग डेढ़ मिनट तक चला, लेकिन इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
भजन समाप्त होते ही Premanand Maharaj मुस्कुराए और उन्होंने कैलाश खेर की प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बहुत सुंदर और अत्यंत प्रभावशाली था। उनके चेहरे की मुस्कान ने वहां मौजूद सभी लोगों को और भी उत्साहित कर दिया। इसके बाद कैलाश खेर ने एक और भजन प्रस्तुत करने की इच्छा जताई, जिस पर महाराज ने सहमति दी।
इसके बाद उन्होंने “5 वर्ष की मीरा लाडली हो…” और “सखियां में खेला जाए री…” जैसे भावपूर्ण भजन अपनी विशेष शैली में सुनाए। इन भजनों ने आश्रम के वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। प्रेमानंद महाराज ने उनकी आवाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी गायकी अत्यंत प्रभावशाली है और इसमें भक्ति का गहरा भाव झलकता है।
इससे पहले कैलाश खेर ने वृंदावन स्थित Banke Bihari Temple में भगवान श्री बांके बिहारी जी के दर्शन किए। मंदिर में उन्होंने लगभग 30 मिनट बिताए और फूल बंगले में विराजमान भगवान की छवि को एकटक निहारते रहे। उन्होंने मंदिर की देहरी पर इत्र भी अर्पित किया और श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। इस दौरान सेवायत मोहित गोस्वामी ने उन्हें भगवान का प्रसाद और अंगवस्त्र भेंट किया।
कैलाश खेर के आगमन से वृंदावन में भक्ति का माहौल और अधिक गहरा हो गया। उनके भजन और प्रेमानंद महाराज के साथ संवाद ने यह संदेश दिया कि संगीत और आध्यात्मिकता एक-दूसरे के पूरक हैं। इस पूरे आयोजन ने श्रद्धालुओं को भक्ति के नए अनुभव से जोड़ा और वातावरण को दिव्यता से भर दिया।
