वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर अब 3 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। वहीं डीजल पर निर्यात शुल्क घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल दोनों पर लागू सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को शून्य कर दिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन से घरेलू ईंधन की कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और यह बदलाव केवल निर्यात से जुड़े ढांचे पर लागू होगा। नए आदेश को शनिवार से प्रभावी कर दिया गया है।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया संकट के बाद पहली बार पेट्रोल निर्यात पर शुल्क लगाया गया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर लगातार बदलावों के बाद अब दरों में कटौती की गई है। डीजल पर पहले 21.5 रुपये प्रति लीटर, फिर 55.5 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि और बाद में 23 रुपये प्रति लीटर तक कमी की गई थी, जिसे अब घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
इसी तरह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी कई बार संशोधन किया गया। पहले यह शुल्क 29.5 रुपये प्रति लीटर था, जिसे बढ़ाकर 42 रुपये और फिर 33 रुपये किया गया था। अब इसे घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, विंडफॉल टैक्स ढांचे के तहत यह बदलाव वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने और निर्यात प्रवाह को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया गया है। सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
पश्चिम एशिया तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक गतिरोध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में भारत का यह टैक्स संशोधन नीति संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
