19 वर्षीय पूजा सिंह इस प्रतियोगिता में मजबूत दावेदार के तौर पर उतरी थीं। उन्होंने इसी साल की शुरुआत में 1.93 मीटर की छलांग लगाकर नेशनल सीनियर रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा मई में एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी पूजा ने 1.93 मीटर की ऊंचाई पार करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। शानदार फॉर्म के कारण उनसे वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में भी पदक की उम्मीद की जा रही थी।
महिलाओं की हाई जंप फाइनल में पूजा सिंह ने 1.84 मीटर की ऊंचाई सफलतापूर्वक पार की। इसके बाद उन्होंने 1.87 मीटर की ऊंचाई पार करने की तीन कोशिशें कीं, लेकिन तीनों प्रयास असफल रहे। इस कारण उन्हें सातवें स्थान पर प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया की इजोबेल लुइसन-रो ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। हंगरी की लिलियाना बाटोरी ने सिल्वर और स्पेन की एताना अलोंसो ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।
पूजा का इस सीजन में प्रदर्शन हालांकि बेहद प्रभावशाली रहा है। एशियन अंडर-20 चैंपियनशिप में रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ गोल्ड जीतने के अलावा वह सीनियर एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मौजूदा चैंपियन भी हैं। ऐसे में वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में पदक से चूकना उनके लिए निराशाजनक जरूर रहा, लेकिन उनका लगातार बेहतर प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए सकारात्मक संकेत है।
भारत की महिला 4×400 मीटर रिले टीम का प्रदर्शन भी फाइनल में उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। भूमिका नेहते, तहुरा खातून, तनु चौधरी और थिया अरुमुगम की भारतीय टीम ने 3 मिनट 45.28 सेकंड का समय दर्ज किया और फाइनल में आखिरी स्थान पर रही। अमेरिका ने 3 मिनट 29.15 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। ऑस्ट्रेलिया को 3 मिनट 31.39 सेकंड के साथ सिल्वर और ग्रेट ब्रिटेन को 3 मिनट 32.08 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज मेडल मिला।
भारत के तीन पदकों में दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल रहे। आशीष यादव ने पुरुषों की जैवलिन थ्रो में सिल्वर मेडल जीतकर भारत के अभियान की शुरुआत की। इसके बाद बसंत कुमार मेघवाल ने पुरुषों की हाई जंप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। पुरुषों की लॉन्ग जंप में शाहनवाज खान ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत की पदक संख्या तीन तक पहुंचाई।
इस प्रदर्शन के साथ भारत ने वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप का समापन तीन पदकों के साथ किया। खास बात यह है कि भारत ने 2021 और 2022 के संस्करणों में जितने कुल पदक जीते थे, इस बार भी उतने ही पदक हासिल किए। पूजा सिंह भले ही अपने रिकॉर्ड प्रदर्शन को पदक में नहीं बदल सकीं, लेकिन युवा भारतीय एथलीटों का यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों के लिए उम्मीद जगाता है।
