सवाई मानसिंह स्टेडियम की सतह को आमतौर पर संतुलित पिच माना जाता है। यहां शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को मदद मिलने की पूरी संभावना रहती है। नई गेंद से हल्की स्विंग और अतिरिक्त बाउंस बल्लेबाजों को परेशान कर सकती है। खासकर पावरप्ले में बल्लेबाजों को संभलकर खेलना होगा, क्योंकि शुरुआती विकेट मैच का रुख बदल सकते हैं।
हालांकि जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, पिच बल्लेबाजी के लिए बेहतर होती जाती है। सेट बल्लेबाज यहां लंबे शॉट आसानी से खेल सकते हैं। अगर कोई बल्लेबाज शुरुआती 25-30 गेंदें टिक गया, तो उसके लिए बड़ा स्कोर बनाना आसान हो सकता है। यही वजह है कि इस मैदान पर कई बार हाई स्कोरिंग मुकाबले भी देखने को मिले हैं।
मिडिल ओवर्स में स्पिन गेंदबाजों की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। जयपुर की सूखी सतह पर गेंद रुककर आती है, जिससे स्पिनर्स को टर्न और ग्रिप मिलती है। ऐसे में दोनों टीमों के स्पिन गेंदबाज मैच विनर साबित हो सकते हैं। खासकर अगर पिच धीमी रही, तो बल्लेबाजों के लिए बड़े शॉट खेलना आसान नहीं होगा।
मिडिल ओवर्स में स्पिन गेंदबाजों की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। जयपुर की सूखी सतह पर गेंद रुककर आती है, जिससे स्पिनर्स को टर्न और ग्रिप मिलती है। ऐसे में दोनों टीमों के स्पिन गेंदबाज मैच विनर साबित हो सकते हैं। खासकर अगर पिच धीमी रही, तो बल्लेबाजों के लिए बड़े शॉट खेलना आसान नहीं होगा।
टॉस भी इस मुकाबले में बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। रात के मैच में ओस का असर देखने को मिल सकता है, जिससे दूसरी पारी में गेंदबाजों को परेशानी होती है। यही कारण है कि टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद कर सकती है। दूसरी पारी में बल्लेबाजी यहां अपेक्षाकृत आसान मानी जाती है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो इस मैदान पर 170 से 190 रन के बीच का स्कोर चुनौतीपूर्ण माना जाता है। अगर शुरुआती विकेट जल्दी नहीं गिरते हैं, तो मुकाबला हाई स्कोरिंग भी हो सकता है। दोनों टीमों की बल्लेबाजी लाइनअप मजबूत है, इसलिए दर्शकों को चौकों-छक्कों से भरपूर रोमांचक मैच देखने को मिल सकता है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि जयपुर की पिच बल्लेबाजों का साथ देती है या फिर गेंदबाज अपनी रणनीति से मुकाबले पर कब्जा जमाते हैं।
