महिलाओं की 75 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा के फाइनल में लवलीना का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की अमासो ग्रीनटी से हुआ, जिसमें उन्हें 1-4 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि हार के बावजूद उन्होंने अपने करियर का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। मुकाबले के बाद उन्होंने इस उपलब्धि को असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को समर्पित करने का फैसला किया, जिसने उनकी जीत को और भी खास बना दिया।
लवलीना के पिता टिकेन बोरगोहेन ने बताया कि बेटी प्रतियोगिता के दौरान भी लगातार असम के बाढ़ पीड़ितों की चिंता कर रही थी। उन्होंने कहा कि लवलीना ने उनसे फोन पर बातचीत के दौरान आग्रह किया था कि जितना संभव हो सके बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद की जाए। इसी सोच के साथ लवलीना अकादमी की ओर से लगातार राहत कार्यों में सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेटी द्वारा अपना पदक बाढ़ पीड़ितों को समर्पित करना पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि फाइनल में हार का थोड़ा दुख जरूर है, लेकिन सिल्वर मेडल भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। यह लवलीना का कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला पदक है और पूरे परिवार के लिए बेहद खुशी का क्षण है। उनके अनुसार पदक जीतने से भी बड़ी बात यह है कि लवलीना ने अपनी सफलता को जरूरतमंद लोगों के नाम कर दिया।
लवलीना की इस उपलब्धि पर देशभर से उन्हें बधाइयां मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उन्हें शानदार प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। टिकेन बोरगोहेन ने इन सभी नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को मिलने वाला यह सम्मान उनके मनोबल को और मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि मुकाबले के बाद लवलीना से उनकी संक्षिप्त बातचीत हुई थी और वह रजत पदक जीतने से संतुष्ट होने के साथ-साथ आगे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए भी उत्साहित हैं।
मुकाबले के बाद लवलीना ने भी स्वीकार किया कि स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का थोड़ा अफसोस जरूर है, लेकिन भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन ने उनकी खुशी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक है, इसलिए इसकी अहमियत उनके लिए बेहद खास है। उनका मानना है कि यदि वह देश के लिए स्वर्ण जीत पातीं तो खुशी और अधिक होती, लेकिन अब उनका पूरा ध्यान आगामी एशियाई खेलों पर है, जहां वह स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरेंगी।
लवलीना बोरगोहेन ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि एक सच्चा खिलाड़ी केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रहता बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाता है। खेल के मैदान में संघर्ष और मैदान के बाहर संवेदनशीलता का यह अनूठा उदाहरण उन्हें देश के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बनाता है। उनकी उपलब्धि और मानवीय सोच आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को भी समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देती है।
