WiFi रेडियो वेव्स यानी रेडियो सिग्नल के जरिए डेटा ट्रांसफर करता है। यही वजह है कि इसका नेटवर्क दीवारों के पार भी पहुंच जाता है और पूरे घर या ऑफिस में इंटरनेट आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरी तरफ LiFi यानी Light Fidelity इंटरनेट पहुंचाने के लिए LED लाइट का इस्तेमाल करता है। इसमें बल्ब बेहद तेजी से ऑन-ऑफ होकर डेटा ट्रांसफर करता है, जिसे इंसानी आंखें पहचान नहीं पातीं।
LiFi को इंटरनेट की अगली पीढ़ी की तकनीक माना जा रहा है क्योंकि इसकी स्पीड WiFi से कई गुना ज्यादा हो सकती है। साथ ही यह ज्यादा सुरक्षित भी माना जाता है, क्योंकि इसका सिग्नल कमरे की रोशनी तक सीमित रहता है और बाहर आसानी से नहीं पहुंचता। हालांकि इसकी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जहां रोशनी नहीं पहुंचेगी, वहां इंटरनेट भी काम नहीं करेगा।
WiFi जहां घरों, दुकानों और ऑफिसों के लिए सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है, वहीं LiFi का इस्तेमाल अस्पतालों, रिसर्च सेंटर और एयरक्राफ्ट जैसी जगहों पर ज्यादा फायदेमंद हो सकता है, जहां रेडियो सिग्नल से दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। फिलहाल LiFi नई तकनीक है और इसका इस्तेमाल सीमित है, लेकिन आने वाले समय में WiFi और LiFi मिलकर इंटरनेट की दुनिया को और ज्यादा तेज, सुरक्षित और स्मार्ट बना सकते हैं।
