यूरोप में टेलीनॉर और BT जैसी कंपनियां विदेशी क्लाउड प्रोवाइडर्स पर निर्भरता कम करने के लिए सॉवरेन क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही हैं। वहीं AWS, Microsoft Azure और Google Cloud जैसी बड़ी कंपनियों पर बैंकिंग, हेल्थ और सरकारी सेवाओं का भारी दबाव पहले से मौजूद है। इसी वजह से कई देश अब अपने संवेदनशील डेटा को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रखने पर जोर दे रहे हैं।
AI के तेजी से बढ़ते उपयोग ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बड़े डेटा और हाई-पावर प्रोसेसिंग की जरूरत होती है। इसी को देखते हुए टेलीकॉम कंपनियां अब खुद को सिर्फ नेटवर्क ऑपरेटर से बदलकर क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर के रूप में स्थापित कर रही हैं।
भारत में भी एयरटेल अपनी Nxtra डेटा सेंटर यूनिट के जरिए सॉवरेन क्लाउड और AI सेवाओं का विस्तार कर रही है, जबकि जियो का AI क्लाउड प्लेटफॉर्म तेजी से यूजर्स जोड़ रहा है। दूसरी तरफ अडानी ग्रुप भी बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रहा है। आने वाले समय में टेलीकॉम सेक्टर की असली ताकत इसी बात पर निर्भर करेगी कि कौन कंपनी डेटा, AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी पर सबसे मजबूत पकड़ बना पाती है।
