लागत का बड़ा हिस्सा ईंधन और बिजली पर खर्च होता है, जिससे कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
टेलीकॉम सेक्टर पर कैसे पड़ेगा असर?
रिपोर्ट्स के अनुसार, मोबाइल टावर को चलाने में आने वाला लगभग 40% खर्च बिजली और डीजल पर निर्भर करता है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से:
टावर ऑपरेशन की लागत बढ़ेगी
डीजल जेनरेटर का खर्च बढ़ जाएगा
बिजली बिल भी कंपनियों पर भारी पड़ेगा
इसका सीधा असर टेलीकॉम कंपनियों की कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट पर पड़ेगा।
कंपनियों पर कितना बढ़ेगा खर्च?
जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी बड़ी कंपनियों को:
हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है
खासकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में जहां डीजल बैकअप ज्यादा इस्तेमाल होता है
5G टावरों में ऊर्जा खपत और भी अधिक होती है, जिससे लागत बढ़ जाती है
क्या महंगे होंगे मोबाइल रिचार्ज?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लागत लगातार बढ़ती रही तो:
टेलीकॉम कंपनियां टैरिफ बढ़ा सकती हैं
रिचार्ज प्लान पहले से महंगे हो सकते हैं
डेटा और कॉलिंग पैक की कीमतों में बदलाव संभव है
हालांकि, कंपनियां अभी सीधे तौर पर कीमतें बढ़ाने से बचने की कोशिश कर रही हैं।
पहले से चल रही थी टैरिफ बढ़ोतरी की तैयारी
टेलीकॉम सेक्टर पहले से ही:
नेटवर्क अपग्रेड (4G से 5G)
स्पेक्ट्रम लागत
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश
जैसे कारणों से टैरिफ बढ़ाने पर विचार कर रहा था। अब ईंधन महंगाई ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है।
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब टेलीकॉम सेक्टर तक पहुंचता दिख रहा है। अगर ऑपरेटिंग कॉस्ट लगातार बढ़ती रही, तो आने वाले समय में मोबाइल रिचार्ज प्लान महंगे हो सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला कंपनियों की रणनीति और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
