वक्री चाल का क्या मतलब है?
ग्रहों के वक्री होने का अर्थ यह नहीं है कि वे वास्तव में अपनी कक्षा में पीछे की ओर चलने लगते हैं। पृथ्वी से देखने पर उनकी गति में बदलाव के कारण वे कुछ समय के लिए पीछे जाते हुए दिखाई देते हैं। ज्योतिष में इस अवधि को पुराने मामलों की समीक्षा, अधूरे कामों के दोबारा सामने आने और कुछ फैसलों में देरी से जोड़कर देखा जाता है।
बुध की वक्री चाल: इन राशियों के लिए बन सकते हैं मौके
मेष: कारोबार से जुड़े लोगों को पुराने संपर्कों से फायदा मिल सकता है। व्यापार में नए अवसर सामने आने और अपनी बात प्रभावी तरीके से रखने का लाभ मिलने की संभावना बताई गई है।
कर्क: नौकरी और करियर के लिहाज से समय बेहतर रह सकता है। नए अवसर मिल सकते हैं और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत माने जा रहे हैं। हालांकि किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसके सभी पहलुओं को जांचना बेहतर रहेगा।
वृश्चिक: कामकाज में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। लंबे समय से अटके काम फिर गति पकड़ सकते हैं और पहले किए गए प्रयासों का फायदा मिलने की संभावना बन सकती है।
मिथुन: इस राशि के स्वामी बुध ही हैं, इसलिए वक्री चाल को विशेष महत्व दिया जाता है। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन मानसिक तनाव और सेहत की अनदेखी से बचना होगा। छोटी बातों पर जरूरत से ज्यादा सोचने से भी बचें।
शुक्र की वक्री चाल में इन राशियों को रहना होगा सतर्क
वृषभ: स्वास्थ्य और खान-पान को लेकर सावधानी जरूरी हो सकती है। दिनचर्या में लापरवाही परेशानी बढ़ा सकती है, इसलिए नियमित जीवनशैली बनाए रखना बेहतर रहेगा।
मिथुन: बच्चों और परिवार से जुड़े मामलों में संयम रखना होगा। भावनाओं में आकर बड़ा फैसला लेने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशना बेहतर माना गया है।
कन्या: शुक्र की वक्री चाल कुछ मामलों में राहत देने वाली हो सकती है। 3 अक्टूबर के बाद भाग्य का साथ मिलने, पुराने काम पूरे होने और नई संभावनाएं सामने आने के योग बताए गए हैं।
तुला: शुक्र तुला राशि के स्वामी हैं और इसी राशि में वक्री होंगे। ऐसे में इस अवधि में सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। आराम और दिनचर्या का ध्यान रखना जरूरी होगा।
मकर: कामकाज में एक साथ कई मोर्चे संभालने के बजाय प्राथमिकताएं तय करके आगे बढ़ना बेहतर रहेगा। छोटी गलती भी परेशानी का कारण बन सकती है, इसलिए महत्वपूर्ण कामों की दोबारा जांच करें।
कुंभ: इस अवधि में भाग्य का साथ अपेक्षाकृत कमजोर रहने की बात कही गई है। ऐसे में किस्मत पर निर्भर रहने के बजाय मेहनत और रणनीति पर ध्यान देना बेहतर होगा। निवेश और बड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है।
दिवाली से पहले क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही ग्रहों की यह चाल?
दिवाली को ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में धन, सुख-समृद्धि और नई शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से दिवाली के आसपास बुध और शुक्र की वक्री चाल को ज्योतिष में विशेष महत्व दिया जा रहा है।
हालांकि, किसी व्यक्ति पर ग्रहों का प्रभाव केवल राशि के आधार पर तय नहीं माना जाता। जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति, भाव, दशा और अन्य ग्रहों के संबंधों के आधार पर परिणाम अलग-अलग बताए जाते हैं। इसलिए यहां बताए गए परिणाम ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
