गिरजाबंध मंदिर से जुड़ी मान्यता रतनपुर के सूर्यवंशी राजा पृथ्वीदेव जू से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि राजा हनुमान जी के परम भक्त थे और एक समय वह गंभीर बीमारी से परेशान हो गए थे। लंबे समय तक इलाज कराने के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद राजा ने भगवान हनुमान की शरण ली और पूरी श्रद्धा के साथ उनकी आराधना शुरू कर दी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दौरान एक रात बजरंगबली ने राजा को स्वप्न में दर्शन दिए और उन्हें अपनी बीमारी से मुक्ति के लिए एक भव्य मंदिर बनवाने का निर्देश दिया।
राजा ने भगवान के आदेश को स्वीकार करते हुए मंदिर का निर्माण शुरू कराया। मंदिर तैयार होने के बाद समस्या यह थी कि उसमें स्थापित करने के लिए हनुमान जी की प्रतिमा नहीं मिल रही थी। राजा इस बात को लेकर चिंतित थे। मान्यता के अनुसार इसके बाद बजरंगबली ने उन्हें दोबारा स्वप्न में दर्शन दिए और पास स्थित महामाया कुंड से प्रतिमा निकालकर मंदिर में स्थापित करने का निर्देश दिया। अगले दिन राजा के सेवक कुंड में पहुंचे और वहां से एक ऐसी प्रतिमा प्राप्त हुई जिसे देखकर सभी हैरान रह गए।
कहा जाता है कि कुंड से मिली प्रतिमा हनुमान जी के नारी स्वरूप की थी। राजा ने इसे भगवान की इच्छा और उनकी लीला माना और पूरे विधि विधान के साथ प्रतिमा को मंदिर में स्थापित कराया। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रतिमा की स्थापना के बाद राजा की बीमारी ठीक हो गई। इसके बाद से ही इस स्थान के प्रति लोगों की आस्था और मजबूत होती चली गई।
गिरजाबंध हनुमान मंदिर की पूजा पद्धति इसकी सबसे बड़ी पहचान है। यहां नारी स्वरूप में विराजमान बजरंगबली का रोजाना देवी की तरह 16 श्रृंगार किया जाता है। भक्त उन्हें साड़ी चूड़ी सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित करते हैं। मंदिर में विराजमान प्रतिमा की एक और विशेषता श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। मान्यता के अनुसार हनुमान जी के कंधों पर भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। यह दृश्य भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
स्थानीय श्रद्धालुओं की मान्यता है कि गिरजाबंध हनुमान मंदिर में सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बीमारी संकट और जीवन की परेशानियों से जूझ रहे लोग यहां बजरंगबली के नारी स्वरूप के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। राजा पृथ्वीदेव से जुड़ी मान्यता भी इस विश्वास को और मजबूत करती है। हालांकि इन बातों का आधार धार्मिक और स्थानीय मान्यताएं हैं जिन्हें आस्था के रूप में देखा जाता है।
गिरजाबंध हनुमान मंदिर अपनी अनोखी पूजा परंपरा और नारी स्वरूप में विराजमान बजरंगबली की प्रतिमा के कारण छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां हनुमान भक्ति का ऐसा रूप दिखाई देता है जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से आकर्षित करने के साथ इस मंदिर को देश के अन्य हनुमान मंदिरों से अलग पहचान देता है।
