राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि मनुस्मृति में महिलाओं के जीवन को लेकर ऐसी बातें कही गई हैं, जिनके अनुसार बचपन में महिला पिता के अधीन, विवाह के बाद पति के अधीन और पति की मृत्यु के बाद बेटों के अधीन रहती है। उन्होंने इस तरह की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को हमेशा किसी पुरुष के अधीन रखने की विचारधारा स्वीकार नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक महिलाओं को स्वतंत्रता के साथ जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हिंदू धर्म और उसके धार्मिक ग्रंथों को राजनीतिक नजरिये से पेश करने का आरोप लगाया। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस हिंदू धर्मग्रंथों को अपने राजनीतिक नैरेटिव के अनुसार प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राहुल गांधी को मनुस्मृति पर टिप्पणी करने से पहले उसे पूरी तरह पढ़ने की सलाह भी दी।
अमित मालवीय ने कहा कि धर्मग्रंथों को केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को हिंदू धर्म के बारे में गलत धारणा बनाने की कोशिश से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म को किसी राजनीतिक प्रमाण की आवश्यकता नहीं है और धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करते समय उनके व्यापक संदर्भ को समझना जरूरी है।
बीजेपी के एक अन्य नेता निशिकांत दुबे ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस और गांधी परिवार के पुराने राजनीतिक फैसलों का उल्लेख करते हुए पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। निशिकांत दुबे ने प्रियंका गांधी का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर राजनीतिक टिप्पणी भी की और कहा कि वह अपने भाई से ज्यादा समझदार हैं।
दुबे ने कांग्रेस के पुराने इतिहास से जुड़े कई राजनीतिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए पार्टी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिन सिद्धांतों और विचारों की बात दूसरों के संदर्भ में करती है, उन्हें अपने परिवार और संगठन के भीतर भी लागू करना चाहिए। इस बयान के जरिए उन्होंने राहुल गांधी की टिप्पणी को कांग्रेस की राजनीतिक विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की।
मनुस्मृति को लेकर भारतीय राजनीति में पहले भी अलग-अलग समय पर तीखी बहस होती रही है। सामाजिक समानता, जाति व्यवस्था और महिलाओं की स्थिति से जुड़े इसके संदर्भों पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के अलग-अलग विचार रहे हैं। इसी वजह से राहुल गांधी की ताजा टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी की टिप्पणी को महिलाओं की समानता और स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि बीजेपी ने इसे हिंदू धर्म और उसके ग्रंथों के संदर्भ में राजनीतिक हमला बताया है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के चलते यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।
