वायरल बुखार होने पर आमतौर पर शरीर का तापमान बढ़ना थकान कमजोरी सिरदर्द बदन दर्द ठंड लगना भूख कम लगना और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में खांसी और नाक बहने की समस्या भी हो सकती है। हालांकि हर बुखार वायरल ही हो ऐसा जरूरी नहीं है। डेंगू मलेरिया टाइफाइड और अन्य संक्रमणों में भी बुखार हो सकता है इसलिए लगातार तेज बुखार रहने पर इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। बाहर से घर लौटने के बाद हाथों को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए क्योंकि संक्रमण फैलाने वाले वायरस शरीर में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने के बाद हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। घर में किसी व्यक्ति को सर्दी खांसी या बुखार हो तो उसके साथ बहुत नजदीकी संपर्क से बचना और जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करना भी संक्रमण के प्रसार को कम कर सकता है।
अगर बुखार हो जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि हर बुखार का कारण बैक्टीरियल संक्रमण नहीं होता। यदि बुखार कई दिनों तक बना रहे बहुत तेज हो जाए या उसके साथ सांस लेने में परेशानी लगातार उल्टी अत्यधिक कमजोरी बेहोशी त्वचा पर दाने या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
कुल मिलाकर बारिश और बदलते मौसम में वायरल बुखार से बचाव के लिए साफ सफाई पौष्टिक भोजन पर्याप्त नींद सुरक्षित पानी और आसपास की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और मानसून का मौसम स्वस्थ रहते हुए बिताया जा सकता है।
