बताया गया कि अरविंद शाम के समय अपने घर पहुंचा था। उस समय घर में पूजा-पाठ चल रहा था। वहां उसकी पत्नी बबीता सिंह के अलावा पुजारी महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा मौजूद थे। पूजा को लेकर जानकारी लेने के दौरान अरविंद ने पुजारियों से आधार कार्ड दिखाने के लिए कहा। इसी बात को लेकर पत्नी के साथ उसकी बहस हो गई।
विवाद बढ़ने के बाद अरविंद ने कथित तौर पर लाइसेंसी हथियार से फायरिंग कर दी। गोली लगने से उसकी पत्नी बबीता और दोनों पुजारियों की मौत हो गई। घटना के बाद अरविंद अपने बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।
तीन लोगों की हत्या की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने आरोपी से लगातार बातचीत करने की कोशिश की। उसके परिवार के लोगों के माध्यम से भी उसे समझाने का प्रयास किया गया। पुलिस का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था।
करीब सात घंटे तक बातचीत और समझाने का सिलसिला चलता रहा। आरोपी आत्मसमर्पण के लिए तैयार नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार, वह बच्चों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहा था। इसी बीच कमरे के भीतर से अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने 10 वर्षीय बेटे को गोली मार दी। बच्चे को गोली लगने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई का फैसला किया। कमरे में प्रवेश के दौरान स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस के अनुसार, टीम के कमरे में पहुंचने पर आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की। इस कार्रवाई में अरविंद सिंह घायल हो गया।
घायल आरोपी और उसके बेटे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई। वहीं, कमरे में मौजूद दो अन्य बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना के बाद मौके पर पुलिस बल, विशेष जांच टीम और फॉरेंसिक टीम को तैनात किया गया।
पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और गोलीबारी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। शुरुआती जानकारी में पूजा के दौरान हुए विवाद को घटना की शुरुआत से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
करीब आठ घंटे तक चले इस घटनाक्रम में आरोपी की पत्नी, दो पुजारियों और उसके बेटे की जान चली गई। पुलिस कार्रवाई के बाद बाकी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और बंधक संकट समाप्त हुआ
