सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने कहा कि संवेदनशील मामलों में शांति, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह ऐसी व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करे, जिससे सभी संबंधित पक्षों की आवश्यकताओं का संतुलित समाधान हो सके। अदालत ने यह भी कहा कि अंतरिम व्यवस्था को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। एक पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में मान्यता देने की मांग करता है। इसी विवाद से संबंधित विभिन्न याचिकाओं पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है और मामला अभी अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा में है।
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि पूर्व की व्यवस्था में बदलाव के कारण धार्मिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ा है। वहीं दूसरे पक्ष ने अपने ऐतिहासिक और धार्मिक दावों को दोहराते हुए संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखा। दोनों पक्षों ने विस्तृत कानूनी तर्क प्रस्तुत किए, जिन पर अदालत ने गंभीरता से विचार किया।
कार्यवाही के दौरान सर्वोच्च अदालत ने सभी पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को भी संयम बरतने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील विषय है और बहस के दौरान प्रयुक्त भाषा तथा शब्दों का चयन अत्यधिक सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले की अंतिम सुनवाई विस्तृत रूप से की जाएगी। इसके लिए दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त तिथि निर्धारित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर पूरे दिन सुनवाई कर सभी पक्षों के तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
इस बीच मध्य प्रदेश सरकार पर अंतरिम व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी रहेगी। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक परिसर में शांति, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बना रहे तथा किसी भी समुदाय के अधिकारों पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े।
भोजशाला विवाद देश के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में शामिल रहा है। सर्वोच्च अदालत के ताजा निर्देशों के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार द्वारा बनाई जाने वाली अंतरिम व्यवस्था और आगामी विस्तृत सुनवाई पर टिकी हैं। अंतिम फैसला आने तक न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार सभी पक्षों के दावों और अधिकारों पर विधिक परीक्षण जारी रहेगा।
