पत्र में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़े दान में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आर्थिक सहयोग दिया है। ऐसे में मंदिर को प्राप्त नकद राशि, सोना, चांदी और अन्य प्रकार के चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप सामने आए हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच कराकर तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतने गंभीर आरोपों के बीच सरकार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आने से लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने लिखा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं और सरकार को इस मामले में भी उसी भावना के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए।
पत्र में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का भी उल्लेख किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ट्रस्ट के कामकाज को लेकर उठे सवालों का निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की आशंका या भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। उनका मानना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होनी चाहिए, जिससे सभी पक्षों के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
कांग्रेस ने अपने पत्र में यह भी मांग की है कि जांच केवल वित्तीय दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि मंदिर को प्राप्त सभी प्रकार के दान और चढ़ावे के संग्रह, रखरखाव, लेखा-जोखा और उपयोग की पूरी प्रक्रिया का भी विस्तार से परीक्षण किया जाए। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए योगदान का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हुआ है या नहीं।
विपक्ष का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सभी वित्तीय रिकॉर्ड और खातों को भी सार्वजनिक किया जाए, ताकि देश और विदेश में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को यह जानकारी मिल सके कि उनके द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे का उपयोग किस प्रकार किया गया। कांग्रेस का मानना है कि पारदर्शिता से न केवल लोगों का विश्वास मजबूत होगा बल्कि भविष्य में इस प्रकार के विवादों की संभावना भी कम होगी।
इस मुद्दे के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्ष इस विषय को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है, जबकि सरकार की ओर से इस संबंध में क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक और संसदीय स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
