बुधवार को लालू प्रसाद यादव ने अपनी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा वापस लिए जाने के मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका रही है। लालू यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और अब सभी की निगाहें सत्ताधारी दल की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध थी। सुरक्षा में बदलाव के फैसले के बाद दोनों नेताओं ने उन्हें उपलब्ध कराई गई नई सुरक्षा व्यवस्था स्वीकार करने के बजाय वापस करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही परिवार के अन्य प्रमुख सदस्यों ने भी सुरक्षा वापस कर दी। इस फैसले ने मामले को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में विधानसभा चुनावों से पहले ऐसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था जैसे प्रशासनिक निर्णयों को भी राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित है, जबकि सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल निर्धारित नियमों और समीक्षा प्रक्रिया के आधार पर तय किए जाते हैं।
इस बीच पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप यादव ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि यदि भविष्य में उनके साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उनके इस बयान ने विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। विपक्षी दल इस मामले को जनता के बीच प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं।
आरजेडी लगातार इस फैसले का विरोध कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल सुरक्षा का मामला नहीं बल्कि राजनीतिक सम्मान और गरिमा से जुड़ा विषय है। पार्टी का आरोप है कि राज्य के वरिष्ठ नेताओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया है, वह उचित नहीं माना जा सकता। आरजेडी नेताओं ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग भी उठाई है।
वहीं दूसरी ओर सरकार से जुड़े नेताओं का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण निर्धारित मानकों और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। उनके अनुसार इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक भावना या पक्षपात की गुंजाइश नहीं होती। हालांकि विपक्ष इन दलीलों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है और लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है।
फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था का यह मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। साथ ही यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाती हैं तथा राजनीतिक दल इसे किस तरह जनता के बीच लेकर जाते हैं।
