मेजर ऋषभ ने बताया कि उन्होंने कभी सेना छोड़ने के बारे में नहीं सोचा था। उन्होंने एक दशक से ज्यादा समय इस सपने को पूरा करने और सैन्य जीवन को जीने में बिताया। इसके बावजूद एक समय ऐसा आया जब उन्हें अपने व्यक्तिगत करियर और माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियों के बीच किसी एक को चुनना पड़ा।
उनके मुताबिक, उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षाओं के बजाय माता-पिता के साथ रहने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि एक बेटे के तौर पर उनकी कुछ जिम्मेदारियां और वादे हैं, जिन्हें उन्हें पूरा करना है। उनके सामने खुद को चुनने या माता-पिता को प्राथमिकता देने का विकल्प था और वह ऐसा फैसला नहीं लेना चाहते थे, जिसके बारे में बाद में उन्हें पछतावा हो।
मेजर ऋषभ ने स्पष्ट किया कि सेना छोड़ने का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया गया। उन्होंने परिवार के साथ बातचीत करने के बाद यह फैसला किया। उनके लिए यह कदम भावनात्मक रूप से कठिन था, लेकिन उन्होंने इसे जरूरी त्याग माना। सैन्य करियर उम्मीद से पहले खत्म होने के बावजूद उन्हें देश की सेवा में बिताए हर पल पर गर्व है।
राष्ट्रपति के ADC के तौर पर अपनी भूमिका को लेकर भी उन्होंने कई बातें बताईं। उनके अनुसार इस पद पर रहते हुए सख्त प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है और इसका असर निजी जीवन पर भी पड़ता है। ADC के कार्यकाल के दौरान शादी करने की अनुमति नहीं होने की बात भी उन्होंने बताई।
मेजर ऋषभ ने अपनी शादी को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्होंने शादी नहीं की है और फिलहाल शादी करने की उनकी कोई योजना भी नहीं है। इस तरह उन्होंने उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें उनकी रिटायरमेंट को शादी की योजना से जोड़कर देखा जा रहा था।
उन्होंने यह भी बताया कि ADC के तौर पर जिम्मेदारियों के कारण निजी जीवन काफी सीमित हो जाता है। परिवार से लंबे समय तक दूर रहना पड़ता है और निजी जिंदगी के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। सार्वजनिक जिम्मेदारियों की लगातार मांग के कारण उन्हें कई ऐसे सामान्य अनुभवों का त्याग करना पड़ा, जिन्हें आम जीवन का हिस्सा माना जाता है।
मेजर ऋषभ ने इस अनुभव को केवल कठिनाइयों के तौर पर नहीं देखा। उनके मुताबिक, सीमित निजी जीवन और लगातार जिम्मेदारियों के बीच यह समय आत्मचिंतन का अवसर भी रहा। उन्होंने अपने फैसले को परिवार के प्रति जिम्मेदारी और जरूरी त्याग के रूप में प्रस्तुत किया।
सेना छोड़ने के बावजूद उनके बयान में सैन्य सेवा के प्रति सम्मान साफ नजर आया। उन्होंने देश की सेवा में बिताए समय को गर्व के साथ याद किया और बताया कि परिवार से बातचीत के बाद लिया गया यह फैसला उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्हें लगा कि इस समय माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
