बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था में व्यापार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है और ये देश वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। दुनिया के कुल व्यापार में भी ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत बताई गई।
गोयल ने भारत की व्यापारिक क्षमताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स दूसरे देशों को भेजता है। दवाओं के क्षेत्र में भी भारत की मजबूत स्थिति है और वह ब्रिक्स देशों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने वाला भरोसेमंद देश बन सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों से अपने बाजारों तक पहुंच आसान बनाने की अपील की। उनका कहना था कि केवल टैक्स कम करने से व्यापार में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होगी। इसके साथ ही सामान के आयात-निर्यात से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने की आवश्यकता है।
गोयल ने कहा कि कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए सामान की मंजूरी की प्रक्रिया में कम समय लगना चाहिए। उनका मानना है कि यदि व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाएं आसान होंगी और मंजूरी में तेजी आएगी तो कंपनियों के लिए अलग-अलग ब्रिक्स देशों के बाजारों में कारोबार करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
बैठक में सप्लाई चेन को मजबूत बनाने का मुद्दा भी प्रमुख रहा। गोयल ने कच्चे माल और जरूरी खनिजों के लिए अलग-अलग देशों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की जरूरत बताई। बदलते वैश्विक हालात के बीच आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत और अधिक भरोसेमंद बनाने को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ब्रिक्स देशों के बीच मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं और यह संगठन के लिए महत्वपूर्ण समय है। उनके अनुसार, इन वर्षों में ब्रिक्स के सदस्य, इसके काम और चर्चा के मुद्दों में बदलाव आया है।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय राजनीतिक तनाव, महामारी और मौसम में बदलाव जैसी कई बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है। इन परिस्थितियों का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है। ऐसे समय में देशों को तेजी से बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को तैयार करना होगा।
विदेश मंत्री ने डिजिटल तकनीक के बढ़ते महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई तकनीक कारोबार करने के तरीकों को बदल रही है। डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से कंपनियों का काम तेजी से हो सकता है और उत्पादन बढ़ाने के साथ आर्थिक विकास के नए अवसर भी सामने आ सकते हैं।
बैठक में भारत का मुख्य संदेश ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने पर केंद्रित रहा। बाजारों तक पहुंच सरल करने, व्यापार नियमों को सुगम बनाने, सामान की मंजूरी में तेजी लाने और सप्लाई चेन मजबूत करने को आपसी व्यापार बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
