राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित आईएफक्यूएम सिम्पोजियम 2026 कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बातचीत में नायडू ने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट एटीएफ की कीमतों पर भारी बोझ डाल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों यानी ओएमसी, दोनों के साथ बातचीत कर रही है और बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह देखा जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस मामले में कोई भी फैसला लेने से पहले नागर विमानन मंत्रालय सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेगा। मंत्रालय संबंधित पक्षों के साथ बैठक करने जा रहा है और सभी पक्षों का नजरिया समझने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।
कॉन्फ्रेंस में नायडू ने विमानन क्षेत्र को लेकर सरकार के दीर्घकालिक विजन की भी जानकारी दी। इसमें सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल यानी एसएएफ को बढ़ावा देना, देश में कई एयरपोर्ट हब विकसित करना और घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करना शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल में एसएएफ की हिस्सेदारी को लेकर नियम बनाया है। इसके तहत 2027 तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल का एक प्रतिशत हिस्सा एसएएफ से आना चाहिए। यह हिस्सेदारी 2028 तक दो प्रतिशत और 2030 तक पांच प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
नायडू ने बताया कि सरकार सरकारी रिफाइनरियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के साथ ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप एसएएफ के उत्पादन को लेकर बातचीत कर रही है। सरकार विमानन क्षेत्र में एसएएफ के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ इसके उत्पादन की क्षमता विकसित करने पर भी काम कर रही है। इसके अलावा भारत का लक्ष्य देशभर में कई एयरपोर्ट हब विकसित कर ग्लोबल एविएशन हब बनने का है। इसके लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाने की योजना है, जिसके तहत छोटे शहरों के यात्री घरेलू गेटवे के माध्यम से लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जुड़ सकेंगे।
एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत इंजन बनाने की क्षमता को महत्वपूर्ण मानता है और इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। इसकी शुरुआत मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ गतिविधियों तथा कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से होगी। उन्होंने स्वदेशी हेलीकॉप्टर इंजन बनाने में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। नायडू ने कहा कि डिफेंस सेक्टर में हासिल की गई जानकारी और तकनीक आगे चलकर सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है। एटीएफ की कीमतों को लेकर सरकार की बातचीत के बीच अब संबंधित पक्षों की राय और उसके बाद मंत्रालय के फैसले पर नजर रहेगी।
