दरअसल गांधी पेट्रोल पंप जिस जमीन पर संचालित हो रहा है उसे शिवपुरी नगर पालिका ने वर्ष 1960 में मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स को लीज पर दिया था। यह लीज 25 साल के लिए थी। इसके लिए 4472 रुपए प्रीमियम तय किया गया था जबकि सालाना किराया 279 रुपए 50 पैसे रखा गया था। इसी जमीन पर बाद में पेट्रोल पंप का संचालन शुरू हुआ। निर्धारित 25 साल की लीज अवधि पूरी होने के बाद जमीन की लीज का नवीनीकरण नहीं कराया गया। इसके बाद नगर पालिका ने जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी और मामला कानूनी विवाद में बदल गया।
जमीन खाली कराने को लेकर नगर पालिका और पेट्रोल पंप संचालक के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला नगर पालिका के पक्ष में आया था। इसके बाद नगर पालिका की ओर से जमीन खाली कराने के लिए नोटिस भी जारी किया गया। हालांकि इसके बावजूद जमीन को लेकर विवाद समाप्त नहीं हुआ और मामला आगे बढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने के एक दिन पहले ही शिवपुरी में इस जमीन को लेकर काफी हंगामा देखने को मिला था। सोमवार को नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा जेसीबी और डंपर लेकर गांधी पेट्रोल पंप पहुंची थीं। उद्देश्य जमीन को खाली कराने की कार्रवाई शुरू करना था। जैसे ही जेसीबी से कार्रवाई शुरू करने की कोशिश हुई पेट्रोल पंप के कर्मचारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कुछ कर्मचारी जेसीबी के सामने ही लेट गए जिसके बाद मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने के एक दिन पहले ही शिवपुरी में इस जमीन को लेकर काफी हंगामा देखने को मिला था। सोमवार को नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा जेसीबी और डंपर लेकर गांधी पेट्रोल पंप पहुंची थीं। उद्देश्य जमीन को खाली कराने की कार्रवाई शुरू करना था। जैसे ही जेसीबी से कार्रवाई शुरू करने की कोशिश हुई पेट्रोल पंप के कर्मचारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कुछ कर्मचारी जेसीबी के सामने ही लेट गए जिसके बाद मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
विरोध के कारण नगर पालिका की कार्रवाई रोकनी पड़ी और करीब दो घंटे तक मौके पर हंगामे की स्थिति बनी रही। इस दौरान जमीन खाली कराने की कोशिश और कर्मचारियों के विरोध के चलते मामला काफी चर्चा में रहा। नगर पालिका की ओर से जमीन पर अपने अधिकार और लीज अवधि पूरी होने का हवाला दिया जा रहा है जबकि पेट्रोल पंप संचालक की ओर से मामले को लेकर कानूनी रास्ता अपनाया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद इस जमीन विवाद में नगर पालिका की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सोमवार को जेसीबी के सामने कर्मचारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रुक गई थी लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के ताजा फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर अगला कदम क्या होगा इस पर सभी की नजर बनी हुई है। गांधी पेट्रोल पंप की जमीन को लेकर कई वर्षों से चल रहा यह विवाद अब निर्णायक कार्रवाई की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
