नीलेश ओझा के मुताबिक, सुरक्षा की मांग करने वाले चार लोगों में दिशा के पिता सतीश सालियान, मामले से जुड़े गवाह समीर वानखेड़े, आशुतोष पाठक और वह खुद शामिल हैं। उनका कहना है कि सीबीआई की ओर से मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद तत्काल पुलिस सुरक्षा की मांग की गई थी।
वकील ने दावा किया कि मामले को सामने लाने वाले और जांच से जुड़े लोगों को कथित तौर पर धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस स्थिति में सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने की मांग की है। ओझा ने यह भी सवाल उठाया कि मामले से जुड़े कुछ लोगों को सुरक्षा मिली हुई है, जबकि शिकायत और जांच से जुड़े लोगों के लिए सुरक्षा की मांग पर कार्रवाई नहीं हुई।
ओझा ने मामले में सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए गवाह संरक्षण योजना और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़ी मांग के संबंध में उपलब्ध सामग्री जांच एजेंसी को भी दी गई है। इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों की भूमिका और सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारणों की जांच की मांग भी की गई है।
दिशा सालियान की मौत का मामला साल 2020 का है। वह सेलिब्रिटी मैनेजर थीं और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी काम कर चुकी थीं। जून 2020 में मुंबई की एक इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हुई थी। शुरुआती तौर पर मामले को आकस्मिक मौत के रूप में दर्ज किया गया था। बाद में उनकी मौत को आत्महत्या के तौर पर भी देखा गया। हालांकि, दिशा के पिता सतीश सालियान लंबे समय से अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते रहे हैं और उन्होंने मामले की विस्तृत जांच की मांग की।
सितंबर 2026 में मामले में नया घटनाक्रम सामने आया, जब सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुई। एफआईआर में हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, आपराधिक साजिश और सबूतों से जुड़ी धाराओं के तहत जांच की जा रही है।
एफआईआर में कई लोगों के नाम और उनकी कथित भूमिकाओं को जांच के दायरे में रखा गया है। हालांकि, जांच में नाम आने और आरोपी साबित होने के बीच अंतर है। जांच एजेंसी को संबंधित आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करनी है। संबंधित पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
दिशा सालियान की मौत के कुछ दिन बाद सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हुई थी। दोनों घटनाओं की समय-सीमा को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, दोनों मामलों की जांच अलग-अलग परिस्थितियों में हुई है।
फिलहाल दिशा सालियान मामले में सीबीआई की जांच जारी है। वहीं, सतीश सालियान, नीलेश ओझा और अन्य लोगों की ओर से सुरक्षा की मांग किए जाने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। धमकियों से जुड़े दावों और सुरक्षा की जरूरत पर संबंधित अधिकारियों के स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
