घटना के सामने आने के बाद विपक्ष की ओर से सरकार पर सीधा हमला किया गया। विपक्षी नेता ने इस वारदात को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह घटना समाज में असुरक्षा की भावना को दर्शाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीड़ित युवक बिहार से था और उसके साथ हुई यह घटना क्षेत्रीय और सामाजिक संवेदनशीलता को उजागर करती है। विपक्ष का कहना है कि इस तरह की घटनाएं राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
विपक्षी बयान में यह भी कहा गया कि राजधानी में प्रशासनिक जिम्मेदारी कई स्तरों पर बंटी हुई है, ऐसे में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत और बढ़ जाती है। उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की बात कही।
इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया। सत्ता पक्ष की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। केंद्रीय स्तर के एक नेता ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से न केवल गलत संदेश जाता है, बल्कि समाज में भ्रम भी पैदा होता है।
सत्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि सरकार हर नागरिक की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जाएगी।
उन्होंने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि ऐसे संवेदनशील मामलों को राजनीतिक रंग देकर मुद्दे को भटकाने की कोशिश की जा रही है, जो सही नहीं है। उनका कहना था कि किसी भी आपराधिक घटना को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना पीड़ित परिवार के साथ न्याय नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ जहां पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक बयानबाज़ी ने मामले को और जटिल बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं में राजनीतिक बहस से ज्यादा जरूरी है कि जांच प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो, ताकि पीड़ित को समय पर न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
