विवाद की शुरुआत अंसारी के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की 2019 में प्रकाशित पुस्तक ‘द आरएसएस: ए मेनेस टू इंडिया’ का हवाला दिया। अंसारी ने पुस्तक में दर्ज एक संदर्भ के आधार पर नेहरू के विचारों का उल्लेख किया था। यह संदर्भ तत्कालीन विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया द्वारा दर्ज किए गए एक आधिकारिक रिकॉर्ड से जुड़ा बताया गया है।
अंसारी के अनुसार, उस रिकॉर्ड में नेहरू के हवाले से कहा गया था कि भारत के लिए बड़ा खतरा कम्युनिज्म नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है। अंसारी ने यह बात नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जुड़े व्यापक संदर्भ में रखी थी।
अंसारी के बयान के बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अंसारी ने जिस पुस्तक और नेहरू के कथन का हवाला दिया, उससे कांग्रेस की मौजूदा विचारधारा पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की कांग्रेस अति-वामपंथ की दिशा में आगे बढ़ गई है।
त्रिवेदी ने अपने बयान में कांग्रेस को ‘मुस्लिम लीग माओइस्ट कांग्रेस’ कहा। उन्होंने यह भी कहा कि अंसारी के संदर्भ से यह बात सामने आती है कि नेहरू के दौर में कम्युनिज्म को भी एक खतरे के रूप में देखा जाता था। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस की वर्तमान राजनीतिक दिशा को लेकर सवाल खड़े किए।
भाजपा नेता ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राजनीतिक विमर्श को भी इस बहस से जोड़ते हुए निशाना साधा। उनका कहना था कि राहुल गांधी की ओर से व्यक्त किए जाने वाले विचारों को नेहरू के राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर देखा जाना चाहिए। यह टिप्पणी भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी वैचारिक बहस का हिस्सा बन गई है।
त्रिवेदी ने केरल में कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के राजनीतिक गठबंधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने मुस्लिम लीग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मोहम्मद इस्माइल से जुड़े राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कांग्रेस के मौजूदा गठबंधन पर सवाल उठाए।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि आज की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को जिन्ना की मुस्लिम लीग से अलग पहचान के रूप में देखा जाता है, तो कांग्रेस को भी उसके ऐतिहासिक राजनीतिक संदर्भ से अलग करके देखने पर सवाल उठ सकते हैं।
इस पूरे विवाद का केंद्र नेहरू से जुड़ा वह ऐतिहासिक कथन है, जिसे हामिद अंसारी ने ए.जी. नूरानी की पुस्तक के हवाले से सामने रखा। भाजपा ने इसे कांग्रेस की वैचारिक दिशा पर हमला करने के आधार के रूप में इस्तेमाल किया है। वहीं, इस बहस में नेहरू के कथन के ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं।
नेहरू के पुराने कथन से शुरू हुई यह राजनीतिक बहस अब कांग्रेस की वर्तमान विचारधारा, नागरिक राष्ट्रवाद, हिंदू दक्षिणपंथी राजनीति और कांग्रेस के राजनीतिक गठबंधनों तक पहुंच गई है। हामिद अंसारी की टिप्पणी और सुधांशु त्रिवेदी की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को मौजूदा राजनीतिक विमर्श में चर्चा का विषय बना दिया है।
