मथुरा। इस भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी (Krishna Paksha, Ashtami) तिथि की मध्यरात्रि नजारा बिल्कुल द्वापर (Dvapar) सरीखा ही था। दिन में खूब बदरा बरसे और रात को भी काली घटाएं छाईं थीं। हर पल जोर जोर से बरसने को आतुर। आसमान में बिजली भी खूब चमकी। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने शुक्रवार को रात के 12 बजाए, संपूर्ण ब्रजमंडल नंद घर आनंद भए, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। अलौकिक आभा, अपार जनसैलाब, ढोल-नगाड़ों की थाप और घंटे-घड़ियालों की गूंज के बीच भगवान श्रीकृष्ण (Lord Sri Krishna) का घर-घर और मंदिरों में जन्म हुआ। लाखों श्रद्धालु इसके साक्षी बने।
मुख्य आयोजन श्रीकृष्ण जन्मस्थान (Shri Krishna Janmasthan) पर हुआ। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भक्तों का उल्लास देखते ही बन रहा था। घड़ी में जैसे ही 11 बजे तत्काल नवगृह स्थापना के साथ पूजन शुरू हो गया। 11.55 बजे तक कमल पुष्प एवं तुलसीदल से सहस्त्रार्चन हुआ। 11.59 बजते ही भागवत भवन स्थित युगल सरकार के पट बंद हो गए।
इस एक मिनट के पल में श्रद्धालुओं को लगा मानो घंटों बीत रहे हों। ठीक 12 बजे लीलाधर के चलित श्रीविग्रह को भागवत भवन लाया गया। यहां रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के ट्रस्टी अनुराग डालमिया, सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने सोने-चांदी से निर्मित 100 किग्रा की कामधेनु गाय की मूर्ति में गंगाजल सहित पंचामृत भरकर लल्ला का अभिषेक किया।
इस दौरान जन्मस्थान पर ढोल-नगाड़े और घंटे-घड़ियाल गूंजते रहे। झांझ-मजीरे, मृदंग और शंख की मंगलध्वनि के बीच कान्हा के बधाई गीत गुंजायमान हो उठे। दर्शन का दौर 1:30 बजे तक चलता रहा।
श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित मूल श्रीगर्भगृह (कारागार) से अभिषेक व पूजा-अर्चना की लाइव स्ट्रीमिंग कराई गई। गर्भगृह में श्रीकृष्ण बाल-गोपाल रूप में विराजते हैं। अब तक केवल भागवत भवन से ही लाइव प्रसारण होता रहा है, शुक्रवार मध्यरात्रि करोड़ों श्रद्धालुओं ने घर बैठे टीवी स्क्रीन पर सीधा प्रसारण देखा। इसके लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा अत्याधुनिक कैमरे लगाकर डिजिटल प्रसारण की व्यवस्था की गई।
