कानपुर देहात में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर तैयारियां तेज हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को जिले में करीब तीन लाख तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। महिलाएं निर्धारित समय के भीतर इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही हैं। तैयार किए जा रहे प्रत्येक तिरंगे की लंबाई 30 इंच और चौड़ाई 20 इंच रखी गई है। इसकी निर्धारित कीमत 20 रुपये तय की गई है। तैयार होने के बाद इन तिरंगों का इस्तेमाल जिले के स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और अन्य सरकारी भवनों पर किया जाएगा।
महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी ने इस अभियान को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ दिया है। उमंग स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष प्रतिमा सिंह के अनुसार, ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उनका कहना है कि आत्मनिर्भर भारत के साथ आत्मनिर्भर महिलाओं का निर्माण भी जरूरी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर का इस्तेमाल कर आय अर्जित कर रही हैं और साथ ही परिवार की जिम्मेदारियों में भी योगदान दे रही हैं।
इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव उन महिलाओं पर दिखाई दे रहा है, जिनके लिए गांव में रोजगार के अवसर सीमित रहे हैं। गरीब, विधवा, दिव्यांग और कम शिक्षित महिलाओं को घर के आसपास काम मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें काम के जरिए सम्मान और अपनी मेहनत की कमाई हासिल करने का अवसर मिल रहा है।
कानपुर देहात की महिला स्वयं सहायता समूहों ने इससे पहले भी अपनी क्षमता दिखाई थी। पिछले वर्ष समूहों से जुड़ी महिलाओं ने करीब 200 मीटर लंबा तिरंगा तैयार किया था। उस दौरान तैयार किए गए झंडों पर महिलाओं को लागत निकालने के बाद करीब छह रुपये तक का मुनाफा मिला था। इस बार भी तिरंगे तैयार करने में आने वाली लागत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं वहन करेंगी और बिक्री से होने वाला मुनाफा सीधे समूह की महिलाओं को मिलेगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त अशोक कुमार ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से कानपुर देहात की महिलाएं सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज तैयार नहीं कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं। तीन लाख तिरंगे तैयार करने का यह अभियान ग्रामीण महिलाओं के हुनर को पहचान देने के साथ उनके लिए स्थायी आर्थिक अवसरों की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
