गिरा हुआ मकान राजेंद्र राव सावदेकर का बताया जा रहा है, जो मकान क्रमांक-12 में रहते थे। मकान गिरने से घर में रखा टीवी, फ्रिज, कूलर, पंखे, गीजर, पानी की टंकी, किराना सामान और अन्य घरेलू वस्तुएं मलबे में दबकर पूरी तरह नष्ट हो गईं। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मकान ढहते और मलबा सड़क पर फैलते हुए दिखाई दे रहा है।
हादसे के समय परिवार घर पर मौजूद नहीं था, क्योंकि खतरे को देखते हुए वे पहले ही रिश्तेदार के घर चले गए थे। हालांकि जब सुबह उन्हें घटना की जानकारी मिली तो वे मौके पर पहुंचे और अपने टूटे हुए घर को देखकर सदमे में आ गए।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रशासन की ओर से न तो स्पष्ट सूचना दी गई और न ही सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय दिया गया। उनका कहना है कि पहले चौड़ीकरण 7 फीट बताया गया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 10 फीट कर दिया गया और इसी दौरान बिना किसी चेतावनी के मकान तोड़ दिया गया।
स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद डर का माहौल है। कई रहवासियों ने अपने घर खाली कर दिए हैं, क्योंकि आसपास के मकानों में दरारें और धंसने की स्थिति देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में करीब 15 परिवार इस चौड़ीकरण कार्रवाई से प्रभावित हो रहे हैं।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से लगभग 25 लाख रुपए के नुकसान का दावा करते हुए मुआवजे की मांग की है। वहीं पीड़ित की मां ने रोते हुए कहा कि उनका सब कुछ खत्म हो गया और अब वे सड़क पर आ गए हैं। परिवार ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर न्याय और उचित मुआवजा दिलाने की अपील की है।
दूसरी ओर भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा। साथ ही आसपास के मकानों को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा दीवार बनाने का काम भी शुरू किया जा रहा है।
