हालांकि, कोर्ट ने साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि शव को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए ताकि वह खराब न हो। आदेश में कहा गया है कि शव को ऐसी मॉर्च्युरी में रखा जाए जहां उसे लंबे समय तक संरक्षित किया जा सके, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में केवल माइनस 4 डिग्री तापमान की सुविधा है, जो कुछ ही दिनों तक शरीर को सुरक्षित रख सकती है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि दीर्घकालिक संरक्षण के लिए माइनस 80 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है।
इसी बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले को और गंभीरता से लेते हुए CBI जांच के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ट्विशा के परिजनों से मुलाकात के दौरान यह आश्वासन दिया कि सरकार हर संभव सहायता देगी और यदि जरूरत पड़ी तो शव को दिल्ली AIIMS तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत रिटायर्ड जज और ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह की जमानत रद्द कराने के लिए भी आवेदन किया जाएगा।
यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसमें प्रशासनिक, राजनीतिक और कानूनी स्तर पर भी कई पहलू जुड़ते जा रहे हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और 7 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने एफआईआर की धाराओं, आरोपी की गिरफ्तारी, फोरेंसिक जांच, कॉल रिकॉर्ड और CCTV फुटेज जैसी सभी जानकारियां तलब की हैं।
दूसरी ओर, परिजनों ने अदालत के फैसले के बाद हाईकोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि उन्हें जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है और निष्पक्ष जांच के लिए दूसरी एजेंसी की आवश्यकता है। परिजनों ने रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह को कंज्यूमर फोरम से हटाने की भी मांग की है, जिसको लेकर राज्यपाल को पत्र भेजा गया है।
फिलहाल पुलिस की तरफ से आरोपी समर्थ सिंह पर लुकआउट नोटिस जारी किया गया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम राशि भी बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन हर एंगल से जांच जारी है।
इसी बीच भोपाल में रिटायर्ड सैनिकों ने भी प्रदर्शन करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। बाइक रैली निकालकर उन्होंने प्रशासन पर दबाव बनाया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
कुल मिलाकर ट्विशा शर्मा केस अब एक हाई-प्रोफाइल जांच में बदल चुका है, जहां अदालत, सरकार, आयोग और जनता सभी की नजरें इस मामले के अगले फैसलों पर टिकी हुई हैं।
