इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया था कि राज्य सरकार हर संभव सहायता करेगी और जरूरत पड़ने पर मामले को केंद्रीय एजेंसी को सौंपा जाएगा। इसी आश्वासन के बाद अब औपचारिक रूप से CBI जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
मामले की मुख्य पात्र ट्विशा शर्मा की मौत ने पूरे प्रदेश में सवाल खड़े कर दिए थे। उनके परिजनों ने शुरू से ही जांच की निष्पक्षता पर संदेह जताया और लगातार CBI जांच की मांग कर रहे थे। अब सरकार की मंजूरी के बाद यह मांग काफी हद तक पूरी होती दिख रही है।
उधर, इस केस में एक और बड़ा घटनाक्रम जबलपुर हाईकोर्ट में देखने को मिला, जहां ट्विशा के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही थी। हालांकि महाधिवक्ता द्वारा केस डायरी पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने के कारण सुनवाई को 2:30 बजे के बाद तक के लिए स्थगित कर दिया गया। मामले की सुनवाई वैकेशन बेंच में चल रही है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
ट्विशा के पिता ने एक बार फिर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जांच को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं। उनका दावा है कि केस से जुड़े कुछ लोग प्रभावशाली पदों पर रहे हैं और वे जांच को दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और कई स्तरों पर निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है।
दूसरी ओर समर्थ सिंह के वकील ने अदालत में कहा कि दंपती के बीच संबंध सामान्य थे और घरेलू जीवन में किसी बड़े विवाद के संकेत नहीं मिलते। उन्होंने यह भी दलील दी कि शादी के बाद शुरुआती समय में छोटे-छोटे मतभेद सामान्य हैं और इसे आपराधिक एंगल से नहीं देखा जाना चाहिए।
इस पूरे मामले में अब नजर इस बात पर टिकी है कि CBI जांच औपचारिक रूप से कब शुरू होती है और हाईकोर्ट में जमानत पर क्या निर्णय आता है। राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक स्तर पर यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसमें और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
