यह प्रदर्शन आशा और उषा कार्यकर्ता महिला संगठन के बैनर तले अपनी विभिन्न मांगों को लेकर किया जा रहा था। बड़ी संख्या में महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से बातचीत की कोशिश की। प्रशासन की ओर से एडीएम और जिला पंचायत सीईओ ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन कार्यकर्ता कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ी रहीं।
संगठन की जिला अध्यक्ष शशि राय ने बताया कि यह आंदोलन प्रदेश स्तरीय निर्देशों के तहत किया गया है। उनका कहना है कि लंबे समय से लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा घोषित बढ़ी हुई राशि का एरियर सहित भुगतान और हर महीने समय पर भुगतान की मांग भी प्रमुख है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग रखी है कि उन्हें हर महीने 5 तारीख तक नियमित भुगतान की गारंटी दी जाए और भुगतान की स्पष्ट स्लिप उपलब्ध कराई जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
इसके अलावा कार्यकर्ताओं ने बीमा और सेवानिवृत्ति लाभ को लेकर भी मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में घायल होने पर कम से कम 1 लाख रुपये और मृत्यु की स्थिति में परिवार को 10 लाख रुपये की सहायता दी जानी चाहिए। साथ ही सेवानिवृत्ति के बाद 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि देने की मांग भी उठाई गई है।
इसी बीच प्रदर्शन के दौरान एक महिला कार्यकर्ता की तबीयत बिगड़ गई और वह जमीन पर गिर पड़ी। मौके पर मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत उसे संभाला और अस्पताल भेजा।
इस घटना पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. ओपी अनुरागी ने बयान देते हुए कहा कि भीषण गर्मी और अधिक देर तक शोर-शराबे के कारण महिला को चक्कर आया होगा। हालांकि इस बयान के बाद संगठन के बीच असंतोष और बहस की स्थिति भी देखी जा रही है।
फिलहाल महिला का इलाज जिला अस्पताल में जारी है और प्रशासन पूरे मामले की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। वहीं प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।
