जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि दोनों बसें वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना ही सड़क पर संचालित हो रही थीं। इसके अलावा बसों में जरूरी सुरक्षा उपकरणों की भी कमी पाई गई। इमरजेंसी एग्जिट गेट, अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं या तो अनुपस्थित थीं या खराब हालत में थीं। इन गंभीर खामियों को देखते हुए विभाग ने सख्त कार्रवाई की।
यातायात थाना प्रभारी सौरव शुक्ला ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना फिटनेस और सुरक्षा मानकों को पूरा किए कोई भी बस सड़क पर नहीं चलने दी जाएगी। नियमों का पालन न करने वाले वाहन मालिकों पर आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यह कार्रवाई हाल ही में हुई एक दर्दनाक घटना के बाद और अधिक तेज कर दी गई है। कुछ दिन पहले शाजापुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक होटल के पास खड़ी बस में अचानक आग लग गई थी, जिसमें 4 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। इस घटना ने परिवहन विभाग और प्रशासन को सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीरता से कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया है।
घटना के बाद से ही जिले में बसों की फिटनेस, सुरक्षा उपकरणों और परमिट की जांच को तेज कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है और मांग की है कि ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएं ताकि सड़क दुर्घटनाओं और आगजनी जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
कुल मिलाकर, शाजापुर में की गई यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि अब परिवहन नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
