हड़ताल के कारण खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हो गई हैं। मरीजों को इलाज और नियमित स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
टीकाकरण, पंजीयन और दवाइयों पर असर
कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से एएनसी पंजीयन, टीकाकरण, जन्म प्रमाण पत्र जारी करने और ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्य प्रभावित हो गए हैं। इसके अलावा एनसीडी, टीबी, हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को नियमित दवाइयां मिलने में भी कठिनाई हो रही है। सीएम हेल्पलाइन से जुड़े मामलों के निराकरण का काम भी बाधित बताया जा रहा है, जिससे आम लोगों की समस्याएं और बढ़ गई हैं।
आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने बताया कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें नियमितीकरण, एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ, 10 प्रतिशत वार्षिक वेतनवृद्धि, महंगाई भत्ता, समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश जैसी कुल आठ प्रमुख मांगें शामिल हैं। संघ के अनुसार, पहले चरण में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया गया था, जिसके बाद 2 जून से ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की गई।
आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें जायज हैं और लंबे समय से लंबित होने के कारण अब आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब सभी की नजरें सरकार और कर्मचारी संघ के बीच होने वाली आगे की बातचीत पर टिकी हैं।
