जानकारी के अनुसार, शनिवार को एक दूरस्थ गांव से आया ग्रामीण अपनी पत्नी को जिला अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज करा रहा था। डॉक्टरों ने महिला के लिए ‘ओ पॉजिटिव’ ब्लड की आवश्यकता बताई थी। इसके बाद ग्रामीण ब्लड बैंक पहुंचा, जहां उसे नियमों के तहत डोनर लाने की बात कही गई।
इसी दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद एक संदिग्ध व्यक्ति, जिसे नशेड़ी और दलाल बताया जा रहा है, ने ग्रामीण से संपर्क किया। उसने ब्लड उपलब्ध कराने का झांसा देकर ढाई हजार रुपये की मांग की। मजबूरी और पत्नी की हालत को देखते हुए ग्रामीण ने पैसे दे दिए और उस व्यक्ति को भोजन भी कराया। लेकिन जब ब्लड देने की बारी आई, तो आरोपी वहां से फरार हो गया।
ठगी का अहसास होने पर ग्रामीण ने अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों को पूरी घटना बताई। मामला तुरंत ब्लड बैंक अधिकारियों और सिविल सर्जन तक पहुंचा। इसके बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और पीड़ित महिला को तत्काल नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराया गया।
रेडक्रॉस रक्त बैंक प्रभारी डॉ. स्वाति मीणा ने स्पष्ट किया कि इस घटना में ब्लड बैंक के किसी कर्मचारी की संलिप्तता नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्लड बैंक के बाहर सक्रिय दलालों और असामाजिक तत्वों पर रोक लगाने के लिए पहले भी सिविल सर्जन को पत्र लिखा गया था और अब कलेक्टर को भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पत्र भेजा जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि रक्त की खरीद-फरोख्त जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए जागरूकता पोस्टर लगाए गए हैं, ताकि लोग ऐसे किसी भी झांसे में न आएं और तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दें।
वहीं, सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि पीड़ित ग्रामीण ने किसी भी कर्मचारी पर आरोप नहीं लगाया है। मामला केवल बाहरी व्यक्ति की ठगी से जुड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि भविष्य में इस तरह की कोई शिकायत मिलती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अगर किसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा।
