स्कूल शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालयों की स्थापना मान्यता नवीनीकरण मान्यता विस्तार संकाय वृद्धि माध्यम परिवर्तन स्थान परिवर्तन और नाम परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया को नई व्यवस्था के तहत संचालित करने का निर्णय लिया है। अब किसी भी विद्यालय को संचालन की अनुमति पाने के लिए छात्र संख्या के आधार पर सुरक्षा निधि यानी सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करनी होगी। इसके साथ ही विद्यालयों में पर्याप्त भवन आधुनिक आधारभूत सुविधाएं प्रशिक्षित शिक्षक प्रयोगशाला पुस्तकालय सूचना एवं संचार तकनीक की व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी सभी मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के तहत राज्य स्तर पर एक राज्य मान्यता समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अथवा सचिव लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त और माध्यमिक शिक्षा मंडल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। समिति निजी विद्यालयों की मान्यता नवीनीकरण विस्तार संकाय वृद्धि स्थान परिवर्तन और नाम परिवर्तन जैसे मामलों में अंतिम निर्णय लेने के साथ नीति और दिशा निर्देश भी तय करेगी।
सरकार ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। अब विद्यालयों को निर्धारित दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। हर वर्ष 30 सितंबर तक प्राप्त आवेदन उसी शैक्षणिक सत्र के लिए विचार किए जाएंगे जबकि इसके बाद आने वाले आवेदन अगले सत्र के लिए मान्य होंगे। बिना नई मान्यता प्राप्त किए किसी भी विद्यालय को नई शाखा शुरू करने की अनुमति नहीं मिलेगी।
ऑनलाइन आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारी को 45 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय देना होगा। यदि आवेदन में कोई कमी या त्रुटि पाई जाती है तो 15 दिनों के भीतर इसकी सूचना आवेदक को दी जाएगी और निर्धारित समय सीमा में संशोधित आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इससे पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी बनेगी।
सरकार ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। यदि कोई विद्यालय निर्धारित मानकों का पालन नहीं करता है तो पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा और गंभीर मामलों में राज्य मान्यता समिति की अनुमति से विद्यालय की मान्यता समाप्त की जा सकेगी। इससे शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
नई गाइडलाइन में अपील का अधिकार भी दिया गया है। यदि किसी विद्यालय का आवेदन अस्वीकार हो जाता है या उसकी मान्यता समाप्त कर दी जाती है तो संबंधित संस्था 30 दिनों के भीतर लोक शिक्षण आयुक्त के समक्ष अपील कर सकेगी। यदि वहां से भी राहत नहीं मिलती है तो राज्य मान्यता समिति के समक्ष दूसरी अपील की जा सकेगी। प्रत्येक अपील के साथ पांच हजार रुपए का शुल्क निर्धारित किया गया है।
राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से निजी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी और छात्रों को सुरक्षित तथा आधुनिक सुविधाओं से युक्त शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। साथ ही मान्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर प्रभावी नियंत्रण भी स्थापित किया जा सकेगा।
