बैठक के दौरान केप्टन डाबर ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों के प्रतीक हैं। मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
डाबर ने राम मंदिर के लिए नए मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यदि नियुक्ति के लिए केवल “राम भक्त” होने की शर्त रखी जाती है तो यह अन्य देवी-देवताओं के श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने सवाल किया कि भगवान को अलग-अलग वर्गों में बांटने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है और धार्मिक संस्थानों में समान भाव की भावना बनाए रखना अधिक आवश्यक है।
प्रदेश कांग्रेस विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय हितों और देश की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर सतर्क रहने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के ऐसे समझौतों से बचना चाहिए जो देश के हितों को प्रभावित कर सकते हों। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से वैचारिक रूप से सक्रिय रहने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जनता के बीच संवाद बढ़ाने का आह्वान किया।
बैठक में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मंदिरों के संचालन और धार्मिक संस्थाओं में संघ के प्रचारकों की भूमिका बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का संचालन संतों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों के हाथों में रहना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि धर्म का मूल आधार इंसानियत और मानवता है तथा कांग्रेस सभी धर्मों के सम्मान और समानता में विश्वास करती है। उन्होंने मंदिरों के संचालन में शंकराचार्यों की भूमिका सुनिश्चित किए जाने की भी मांग रखी।
बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सामाजिक सौहार्द, धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा को पार्टी की प्राथमिकता बताया। वहीं भाजपा और सरकार पर लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इन बयानों के बाद संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इस तरह के मुद्दे प्रदेश की राजनीति में आगे भी बहस का विषय बने रह सकते हैं।
