पुलिस के अनुसार, इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र के रहने वाले शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें एक महिला और उसके साथियों द्वारा पहले जान-पहचान बढ़ाकर फंसाया गया और फिर निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर एक करोड़ रुपये की मांग की गई।
जांच में सामने आया कि इस पूरे गिरोह की मास्टरमाइंड अलका दीक्षित है, जो पहले से ही कई आपराधिक मामलों में शामिल रही है और अवैध शराब व ड्रग नेटवर्क से जुड़ी बताई जा रही है। अलका ने कारोबारी को प्रॉपर्टी डीलिंग और पार्टनरशिप के बहाने जाल में फंसाया था, जिसके बाद दबाव बनाकर पैसे और हिस्सेदारी की मांग शुरू हो गई।
गिरोह में शामिल अलका के बेटे जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और अन्य साथियों ने कथित रूप से कारोबारी पर हमला भी किया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में एक पुलिसकर्मी का नाम सामने आया।
इंटेलिजेंस शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा पर आरोप है कि वह इस पूरे नेटवर्क से जुड़ा था और पीड़ित के निजी वीडियो व फोटो साझा करने में भूमिका निभा रहा था। उसके मोबाइल और चैट रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं।
क्राइम ब्रांच ने गुप्त ऑपरेशन चलाकर एक साथ कई स्थानों पर दबिश दी और अलका, जयदीप, लाखन चौधरी समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। वहीं, भोपाल से श्वेता जैन को भी हिरासत में लेकर इंदौर लाया गया, जिससे पुराने हनी ट्रैप नेटवर्क की कड़ियां फिर से खुलने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह हो सकता है, जो लंबे समय से हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग के जरिए लोगों से वसूली कर रहा था। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले ने न केवल इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
