इस नई व्यवस्था को खाद्य सब्सिडी के डिजिटल वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है। सरकारी योजना के तहत चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली ऐसे पहले केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां पात्र लाभार्थियों तक खाद्य सब्सिडी प्रोग्रामेबल CBDC यानी डिजिटल रुपये के रूप में पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की जा रही है। इसका मकसद सब्सिडी के वितरण को पारदर्शी और ट्रेसेबल बनाने के साथ यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता निर्धारित उद्देश्य के लिए ही इस्तेमाल हो।
CBDC आधारित DBT की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रोग्रामेबल होना है। सामान्य बैंक खाते में मिलने वाली नकद राशि का इस्तेमाल लाभार्थी अपनी जरूरत के मुताबिक कर सकता है लेकिन इस व्यवस्था में डिजिटल लाभ को एक निर्धारित उद्देश्य से जोड़ा जा सकता है। खाद्य सब्सिडी के मामले में राशि का इस्तेमाल राशन और जरूरी खाद्य वस्तुओं की खरीद के लिए किया जा सकेगा। इसके लिए अधिकृत या सूचीबद्ध दुकानदारों के माध्यम से डिजिटल भुगतान की व्यवस्था होगी।
इस व्यवस्था से लाभार्थियों को खाद्य वस्तुओं के चयन में भी अधिक विकल्प मिलने की बात कही गई है। गेहूं और चावल के अलावा दाल या अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की खरीद का विकल्प भी उपलब्ध कराया जा सकता है। तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि सब्सिडी की राशि को किसी दूसरे काम में डायवर्ट न किया जा सके। शिवराज सिंह चौहान ने इस पहल को तकनीक और जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण बताया और इसे विकसित करने वाली विभागीय टीम की सराहना की।
चंडीगढ़ में शुरू किया गया मॉडल केवल स्थानीय प्रयोग तक सीमित नहीं माना जा रहा है। सरकार इसे भविष्य में अन्य क्षेत्रों में लागू किए जाने वाले मॉडल के रूप में देख रही है। इससे खाद्य सब्सिडी के वितरण में होने वाले लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और पूरी प्रक्रिया को अधिक ट्रेसेबल बनाया जा सकेगा। इससे सरकारी सहायता के सही लाभार्थी तक पहुंचने और उसके निर्धारित उद्देश्य में इस्तेमाल होने की निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है।
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और गरीबों के हितों को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि कृषि नीति और खाद्य सुरक्षा से जुड़े फैसलों में किसान हित और जनहित सर्वोच्च रहेंगे। उन्होंने देश में गेहूं और धान के पर्याप्त भंडार का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करने में सक्षम है और जरूरत पड़ने पर खाद्यान्न का निर्यात भी कर सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को भी गरीब परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा बताया। उनका कहना था कि खाद्य सुरक्षा से परिवारों के खर्च का बोझ कम होता है और बची हुई राशि बच्चों की शिक्षा तथा दूसरी जरूरी जरूरतों पर खर्च की जा सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं का लाभ बिना अनावश्यक बाधा के पहुंचे।
शिवराज सिंह चौहान ने तकनीक आधारित इस पहल को सरकार की उस सोच से जोड़ा जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ कागजों और फाइलों तक सीमित न रहकर सीधे लोगों की जिंदगी में दिखाई देना चाहिए। CBDC आधारित DBT इसी दिशा में एक नया प्रयोग है जिसमें डिजिटल रुपये के जरिए खाद्य सब्सिडी को अधिक उद्देश्यपूर्ण और पारदर्शी तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
