टैक्सी चालक संघ के मुताबिक 23 से 25 जून तक एयरपोर्ट राइड के बहिष्कार के दौरान कंपनियों पर दबाव बना था और कुछ राइड के किराए में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक सुधार किया गया था। हालांकि आंदोलन खत्म होने के बाद दोबारा पुराने किराए लागू कर दिए गए। ड्राइवरों का आरोप है कि अब कई छोटी राइड के लिए उन्हें महज 30 से 40 रुपये तक मिल रहे हैं जबकि पहले इसी तरह की बुकिंग पर 50 से 60 रुपये तक का भुगतान होता था। चालकों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती लागत वाहन की सर्विसिंग बीमा परमिट और दूसरे खर्चों के बीच इतनी कम कमाई में परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले के अनुसार शनिवार की बैठक में सभी ड्राइवरों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह बैठक केवल किराया बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी किराया प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर है। संघ के मुताबिक सरकार को ऐसी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए जिसमें प्रत्येक राइड के लिए 50 से 60 रुपये का बेस फेयर तय हो। इसके साथ यात्रा के समय के आधार पर 1 से 1.50 रुपये प्रति मिनट टाइम चार्ज और वाहन की श्रेणी के अनुसार 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर की दर लागू की जानी चाहिए।
ड्राइवरों का कहना है कि केवल प्रतिशत के आधार पर किराया बढ़ाने से उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक वर्ष 2014 में एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था में बेस फेयर टाइम चार्ज और दूरी के हिसाब से भुगतान शामिल था लेकिन अब कई मामलों में केवल तय दूरी के आधार पर किराया दिया जाता है। इससे ट्रैफिक में फंसने या यात्री का इंतजार करने के दौरान ड्राइवर को अतिरिक्त समय का भुगतान नहीं मिलता।
संघ के प्रस्तावित किराया मॉडल के अनुसार अरेरा हिल्स से राजा भोज एयरपोर्ट तक मौजूदा 246 से 282 रुपये का किराया बढ़कर करीब 416 से 552 रुपये तक हो सकता है। इसी तरह न्यू मार्केट से रेलवे स्टेशन का किराया 95 से 108 रुपये की जगह करीब 205 से 270 रुपये तक पहुंच सकता है। लालघाटी से एमपी नगर का किराया 152 से 167 रुपये से बढ़कर 302 से 401 रुपये और रातीबड़ थाना से भोपाल रेलवे स्टेशन का किराया 274 से 314 रुपये से बढ़कर 474 से 638 रुपये तक हो सकता है।
टैक्सी चालकों की मांगों में निर्धारित किराया नीति लागू करने के अलावा एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी पर रोक निजी नंबर वाले वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई अवैध बाइक टैक्सी संचालन पर रोक और ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था शामिल है। इससे पहले भी ड्राइवरों ने फटे कपड़े पहनकर और हाथों में कटोरा लेकर प्रदर्शन कर अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।
अब शनिवार की महाबैठक को आंदोलन की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। संघ का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया तो भोपाल से शुरू हुआ यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में टैक्सी सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।
