नगर निगम ने शहर को 21 जोन में बांटकर विशेष सर्वे टीमों का गठन किया है। ये टीमें छोटे मोहल्लों से लेकर बड़ी कॉलोनियों और प्रमुख इलाकों तक रिहाइशी भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी जुटाएंगी। जांच के दौरान संपत्ति कर रिकॉर्ड भवन के वास्तविक उपयोग सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी भवनों के इस्तेमाल की स्थिति देखी जाएगी। निगम का लक्ष्य करीब 10 से 15 दिनों में सर्वे पूरा करने का है और जहां नियमों का उल्लंघन सामने आएगा वहां मौके पर ही नोटिस देने की तैयारी है।
नगर निगम के रिकॉर्ड में करीब 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे मकान बताए जा रहे हैं जहां कारोबार तो चल रहा है लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए जरूरी अनुमति या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। यही वजह है कि निगम अब रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को भी जांचने जा रहा है।
इस पूरी कार्रवाई के पीछे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी अहम हैं। 5 अगस्त की सुनवाई में अदालत ने अवैध निर्माण और रिहाइशी भवनों के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। इसके बाद नगर निगम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। निगम को 15 सितंबर तक कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी है। ऐसे में सर्वे को समयसीमा के भीतर पूरा करने की तैयारी की जा रही है।
हालांकि व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग की कार्रवाई से छोटे कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। व्यापारियों का सुझाव है कि ब्यूटी पार्लर सैलून कोचिंग किराना जैसी छोटी गतिविधियों को राहत दी जाए और प्रमुख सड़कों पर मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था लागू की जाए। इसके तहत तय शर्तों के साथ एक ही क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। पार्किंग ट्रैफिक प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए चौड़ी सड़कों पर नियंत्रित व्यावसायिक उपयोग की व्यवस्था को भी समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।
भोपाल में लंबे समय से मास्टर प्लान लागू नहीं होने को भी मौजूदा स्थिति की बड़ी वजह बताया जा रहा है। भोपाल की विकास योजना का अंतिम प्रकाशन वर्ष 2005 में हुआ था और इसके बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि शहर के विस्तार और बढ़ती कारोबारी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं होने के कारण कई लोगों ने आवासीय क्षेत्रों में ही कारोबार शुरू कर दिया।
व्यापारियों का दावा है कि इन गतिविधियों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और कई कारोबारी व्यावसायिक दर से संपत्ति कर तथा अन्य शुल्क भी जमा करते हैं। अनुमान है कि व्यापक कार्रवाई होने पर करीब पांच लाख लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब नगर निगम के सर्वे पर शहर के हजारों कारोबारियों और मकान मालिकों की नजर है। आने वाले दिनों में सर्वे के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से साफ होगा कि कितनी संपत्तियां नियमों के दायरे में आती हैं और कितनों पर कार्रवाई की स्थिति बनती है।
