भोपाल । भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार को लेकर नगर निगम की कार्रवाई अब और सख्त होती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने शहरभर में ऐसे भवनों और संपत्तियों की पहचान शुरू की है जहां आवासीय उपयोग की अनुमति के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 62 हजार से ज्यादा संपत्तियां जांच के दायरे में हैं और नोटिस की संख्या लगातार बढ़ रही है। 18 अगस्त तक नगर निगम की ओर से 6589 नोटिस जारी किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद भी सर्वे और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया जारी रही।
नगर निगम की कार्रवाई का अगला चरण सुनवाई और अंतिम आदेश से जुड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक नोटिस मिलने के बाद संबंधित संपत्ति के दस्तावेज और वास्तविक उपयोग की जांच की जाएगी। मामले के गुण दोष के आधार पर अंतिम आदेश जारी होगा। इसके बाद यदि व्यावसायिक गतिविधि नियमों के विपरीत पाई गई और आदेश का पालन नहीं हुआ तो प्रतिष्ठान को सील करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। कुछ मामलों में अंतिम चेतावनी भी दी जा चुकी है और ऐसे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की तैयारी है।
इस पूरे अभियान ने भोपाल के व्यापारियों में चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि शहर के कई इलाकों में वर्षों से छोटे कारोबार चल रहे हैं और अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग होने से दुकानदारों के साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से ऐसी नीति बनाने की मांग की है जिससे नियमों के दायरे में रहकर पुराने व्यावसायिक उपयोग को नियमित करने का रास्ता निकले। व्यापारियों की ओर से मिक्स्ड लैंड यूज और नए मास्टर प्लान को लेकर भी मांग उठाई जा रही है।
कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर भी उतर चुके हैं। रोशनपुरा चौराहे पर प्रदर्शन और चक्काजाम के दौरान कारोबारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। महिला कारोबारियों ने भी विरोध में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि ब्यूटी पार्लर क्लीनिक दुकान और दूसरे छोटे व्यवसाय बंद होने से बड़ी संख्या में लोगों की रोजी रोटी प्रभावित हो सकती है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से व्यावहारिक समाधान निकालने की अपील की है।
दूसरी तरफ रहवासी संगठन इस कार्रवाई के समर्थन में हैं। उनका कहना है कि आवासीय कॉलोनियों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से पार्किंग ट्रैफिक शोर और सुरक्षा जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। इसी वजह से कई रहवासी संगठनों ने अभियान चलाकर आवासीय क्षेत्रों में नियमों के खिलाफ कारोबार पर रोक लगाने की मांग की है। भोपाल में रहवासियों की ओर से टॉर्च मार्च भी निकाला जा चुका है और आगे भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की गई है।
नगर निगम का सर्वे केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहने वाला है। अधिकारियों की ओर से भवन की अनुमति भूमि उपयोग और आसपास की स्थिति की भी जांच की जा रही है। मुख्य मार्गों से लेकर उनसे जुड़ी गलियों और कॉलोनियों तक सर्वे का दायरा बढ़ाया गया है। जल निकायों हरित पट्टी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित निर्माण भी जांच के दायरे में हैं। नगर निगम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि स्वीकृत उपयोग और मौके पर हो रही गतिविधि में कितना अंतर है।
इस विवाद की जड़ में भोपाल की पुरानी शहरी योजना और भूमि उपयोग का सवाल भी है। व्यापारियों का कहना है कि शहर के कई हिस्सों में लंबे समय से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां एक साथ चल रही हैं। उनका तर्क है कि मास्टर प्लान में स्पष्ट नीति बनाकर इस स्थिति का समाधान किया जा सकता है। दूसरी ओर रहवासियों का कहना है कि नियमों को नजरअंदाज कर किसी भी इलाके को धीरे धीरे बाजार में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भोपाल में आगे रास्ता क्या निकलेगा। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम पर नियमों का पालन कराने का दबाव है तो दूसरी तरफ हजारों कारोबारियों की आजीविका का सवाल है। ऐसे में सुनवाई के बाद होने वाले अंतिम आदेश और सरकार की भविष्य की शहरी नीति इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी। फिलहाल नोटिस और सर्वे के बीच भोपाल के व्यापारियों और रहवासियों की निगाह नगर निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
