पीओके में यह प्रदर्शन विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटों को समाप्त करने की मांग को लेकर किया जा रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के बैनर तले हजारों लोग रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च निकाल रहे थे। संगठन का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान बिना किसी उकसावे के गोलीबारी कर दी जिससे बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारी आधुनिक हथियारों से लैस थे और उन्होंने पहले सुरक्षाबलों पर हमला किया जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई।
हिंसा के बाद पूरे पीओके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त सेना पैरामिलिट्री बल और आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी की तैनाती की गई है। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी है और इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
दरअसल पीओके विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं जिनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं जबकि 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो 1947 और उसके बाद जम्मू कश्मीर से पाकिस्तान चले गए थे। इन सीटों के मतदाता पीओके में नहीं बल्कि पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों में रहते हैं। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की राजनीतिक पार्टियां पीओके की सरकार के गठन में हस्तक्षेप करती हैं और कई बार इन्हीं सीटों के कारण विधानसभा का बहुमत बदल जाता है।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की मांग है कि पीओके की विधानसभा चुनने का अधिकार केवल वहां रहने वाले लोगों के पास होना चाहिए और शरणार्थी सीटों की मौजूदा व्यवस्था समाप्त की जाए। विपक्षी दलों का भी आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ सहित कई दल पहले भी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुके हैं।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान ने पहले से तनावपूर्ण माहौल को और अधिक गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद स्थापित नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
