सबसे अहम समझौता रक्षा साझेदारी को लेकर हुआ। भारत और यूएई ने रणनीतिक रक्षा सहयोग के नए फ्रेमवर्क पर सहमति जताई है। इसके तहत दोनों देश रक्षा तकनीक, संयुक्त उत्पादन, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद विरोधी अभियानों में साथ काम करेंगे। माना जा रहा है कि यह समझौता पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच बेहद महत्वपूर्ण है।
ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी भारत को बड़ी राहत मिली है। दोनों देशों ने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व और रसोई गैस सप्लाई को लेकर बड़े समझौते किए हैं। भारत की सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और एडीएनओसी के बीच हुए समझौते के तहत यूएई भारत को दीर्घकालिक और प्राथमिकता के आधार पर LPG सप्लाई करेगा। इससे भारत में गैस और ईंधन की सप्लाई स्थिर रहने में मदद मिलेगी, खासकर ऐसे समय में जब होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हैं।
इसके अलावा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को लेकर हुए समझौते से भारत भविष्य की आपूर्ति बाधाओं से निपटने के लिए अपनी तैयारी और मजबूत कर सकेगा। ADNOC पहले से भारत के भूमिगत तेल भंडारों में निवेश कर रहा है और अब यह साझेदारी और गहरी होगी।
समुद्री और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी बड़ी पहल हुई है। गुजरात के वडिनार में जहाज मरम्मत और शिप रिपेयर क्लस्टर विकसित करने के लिए MoU साइन किया गया है। इससे भारत को क्षेत्रीय समुद्री हब बनाने में मदद मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
إن الصداقة بين الهند والإمارات قوية للغاية! وستواصل بلداننا العمل معاً بهدف بناء مستقبل أفضل لكوكبنا.@MohamedBinZayed pic.twitter.com/2IGiZCeBUY
— Narendra Modi (@narendramodi) May 15, 2026
इसके साथ ही UAE ने भारत में 5 अरब डॉलर निवेश का भी ऐलान किया है। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग और हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था और निवेश माहौल को मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर पीएम मोदी का UAE दौरा सिर्फ कूटनीतिक मुलाकात नहीं रहा, बल्कि ऊर्जा, रक्षा, AI और निवेश जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता साबित हुआ है।
