राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह नई कर दर 15 मई 2026 से लागू होगी और अगले छह महीनों तक प्रभावी रहेगी। माना जा रहा है कि इससे घरेलू एयरलाइंस के परिचालन खर्च में कमी आएगी, जिससे उड़ानों के संचालन को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी। विमानन क्षेत्र में एटीएफ सबसे बड़ा परिचालन खर्च माना जाता है और टैक्स में कमी से कंपनियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पिछले कुछ समय से वैश्विक हालातों के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। इसका सीधा असर विमानन ईंधन की कीमतों पर पड़ा है, जिससे एयरलाइंस की लागत लगातार बढ़ रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से एटीएफ पर टैक्स कम करने की अपील की थी ताकि घरेलू विमानन सेवाओं को स्थिर बनाए रखा जा सके और यात्रियों पर बढ़ते किराए का बोझ कम किया जा सके।
महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले को विमानन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य देश के सबसे व्यस्त विमानन केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन होता है और हर साल करोड़ों यात्री हवाई यात्रा करते हैं। ऐसे में टैक्स में यह कटौती एयरलाइंस के लिए परिचालन लागत को नियंत्रित करने में सहायक साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन लागत में कमी आने से एयरलाइंस को टिकट कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी से बचने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा यह कदम विमानन क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और यात्रियों की संख्या को प्रभावित होने से रोकने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
विमानन क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में कई वैश्विक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर चुका है। महामारी के बाद से उद्योग धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट रहा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर दबाव बढ़ा दिया। ऐसे में सरकारों द्वारा दी जाने वाली कर राहत और नीतिगत सहायता को उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि अन्य राज्य भी इसी तरह एटीएफ पर वैट में कटौती करते हैं, तो देशभर में विमानन उद्योग को और अधिक स्थिरता मिल सकती है। इससे यात्रियों को भी लंबे समय तक नियंत्रित किराए और बेहतर सेवाओं का लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।
