सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक, श्रीलंका में 79 प्रतिशत लोगों ने भारत के पक्ष में अपनी राय दी है, जबकि 63 प्रतिशत श्रीलंकाई नागरिकों ने भारत को अपना सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी देश माना है। इसके विपरीत, पाकिस्तान में केवल सात प्रतिशत लोगों ने ही भारत के प्रति सकारात्मक भावना व्यक्त की। बांग्लादेश में 42 प्रतिशत लोगों का रुख भारत के प्रति सकारात्मक पाया गया, हालांकि वहां भारत को खतरा मानने वालों की संख्या भी उल्लेखनीय रही।
रिपोर्ट में बांग्लादेश और भारत के बीच द्विपक्षीय धारणाओं में आई गिरावट को भी रेखांकित किया गया है। वर्तमान में केवल 25 प्रतिशत भारतीय बांग्लादेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान दोनों देशों के बीच जनता के स्तर पर धारणा में कमी दर्ज की गई है। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, वर्ष 2024 में जहां 57 प्रतिशत बांग्लादेशी भारत के पक्ष में थे, वहीं भारत में यह आंकड़ा 35 प्रतिशत दर्ज किया गया था।
भारत और पाकिस्तान के बीच पारस्परिक संबंधों पर सर्वे से स्पष्ट हुआ है कि दोनों देशों की बहुसंख्यक आबादी एक-दूसरे को अपने लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा मानती है। वहीं वैश्विक सहयोगियों के प्रश्न पर 36 प्रतिशत भारतीयों ने रूस को अपना सबसे प्रमुख और भरोसेमंद सहयोगी बताया, जबकि 16 प्रतिशत ने अमेरिका का नाम लिया। मध्य प्रदेश सहित देश भर के विदेश नीति विशेषज्ञों की नजरें इस रणनीतिक रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
वैश्विक स्तर पर भारत के प्रभाव को लेकर अमेरिका में किए गए अध्ययन में 54 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि वैश्विक मंच पर भारत का प्रभाव स्थिर बना हुआ है। वहीं 30 प्रतिशत अमेरिकियों ने माना कि भारत का प्रभाव वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ा है। राजनीतिक आधार पर अमेरिकी डेमोक्रेट्स के बीच भारत के प्रति समर्थन अधिक देखने को मिला। यह सर्वेक्षण दक्षिण एशिया में बदलते कूटनीतिक और क्षेत्रीय समीकरणों की एक स्पष्ट झलक पेश करता है।
