दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल हॉर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी मात्रा गुजरती है। लेकिन मौजूदा संघर्ष और समुद्री तनाव के कारण इस रास्ते से तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व से तेल निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
ऊर्जा विश्लेषकों के मुताबिक, फरवरी के अंत से अब तक वैश्विक बाजार से करोड़ों बैरल तेल कम हो चुका है। सऊदी अरब, इराक, ईरान और कुवैत जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के उत्पादन में भारी गिरावट देखी गई है। इससे दुनिया अब पहले से जमा तेल भंडार और रणनीतिक रिजर्व पर निर्भर होती जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी चेतावनी दी है कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो तेल की मांग सप्लाई से कहीं ज्यादा हो जाएगी। एजेंसी के अनुसार, दुनिया भर के व्यावसायिक तेल भंडार रिकॉर्ड गति से खाली हो रहे हैं और कई देशों के पास केवल कुछ हफ्तों का स्टॉक बचा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि संकट केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कमी से परिवहन, बिजली उत्पादन, विमानन, खाद उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। अगर हॉर्मुज स्ट्रेट जल्द पूरी तरह नहीं खुला, तो वैश्विक बाजार में ईंधन संकट और महंगाई तेजी से बढ़ सकती है।
सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर और जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने भी कहा है कि दुनिया का “सुरक्षा कवच” यानी तेल भंडार तेजी से कमजोर हो रहा है। फिलहाल देशों द्वारा रणनीतिक रिजर्व का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन यह लंबे समय तक पर्याप्त नहीं रहेगा।
भारत समेत कई एशियाई देश इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि उनकी बड़ी तेल जरूरतें मध्य पूर्व से पूरी होती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर असर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
