वाशिंगटन। अमेरिका में चुनावी नियमों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को संघीय अदालत से झटका लगा है। वॉशिंगटन डीसी के अमेरिकी जिला न्यायाधीश अमीर एच. अली ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर रोक लगा दी, जिसके तहत राज्यों और स्थानीय सरकारों को मिलने वाली आतंकवाद-रोधी (एंटी-टेरर) फंडिंग को चुनावी नियमों में बदलाव से जोड़ा गया था। 28 सितंबर को दिए गए 24 पेज के फैसले में अदालत ने कहा कि संघीय एजेंसियों के पास कांग्रेस से मिली ऐसी शर्तें लगाने की वैधानिक अनुमति नहीं थी।
यह मामला करीब 1.1 अरब डॉलर के Homeland Security Grant Program से जुड़ा है। इस कार्यक्रम के तहत राज्यों और स्थानीय सरकारों को आतंकवादी हमलों और अन्य सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए फंड दिया जाता है। ट्रंप प्रशासन ने फंडिंग की शर्तों में चुनाव संबंधी कई बदलाव शामिल किए थे। इनमें कुछ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम को हाथ से चिह्नित पेपर बैलेट से बदलना, चुनाव परिणामों के मैनुअल ऑडिट और मतदाता सूची में नागरिकता की जांच जैसी शर्तें शामिल थीं।
20 फीसदी फंड रोकने की थी शर्त
FEMA की ओर से जारी फंडिंग नियमों में कहा गया था कि तय चुनावी शर्तों को पूरा नहीं करने वाले राज्यों और शहरी क्षेत्रों की करीब 20 फीसदी ग्रांट राशि रोकी जा सकती है। शर्तों में मतदाताओं और चुनावकर्मियों की नागरिकता की जांच के लिए संघीय डेटाबेस के इस्तेमाल तथा मतदान प्रणाली और चुनावी ऑडिट में बदलाव जैसी आवश्यकताएं शामिल थीं।
प्रशासन का तर्क था कि इन बदलावों का उद्देश्य चुनावों को विदेशी हस्तक्षेप और साइबर हमलों से सुरक्षित करना है। हालांकि, स्थानीय सरकारों ने अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि FEMA को आतंकवाद-रोधी फंड के बदले चुनावी व्यवस्था में बदलाव कराने का अधिकार नहीं है।
जज बोले- FEMA को चुनावी नियम तय करने का अधिकार नहीं
जज अमीर अली ने अपने फैसले में कहा कि कांग्रेस ने FEMA को आतंकवाद और अन्य सुरक्षा खतरों से महत्वपूर्ण ढांचे की रक्षा के लिए अनुदान देने का अधिकार दिया है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल चुनाव प्रशासन के नियम तय करने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, चुनावी बदलावों की शर्तें उस ग्रांट के मूल उद्देश्य से पर्याप्त रूप से जुड़ी हुई नहीं थीं।
अदालत ने इस तरह FEMA को एंटी-टेरर ग्रांट के जरिए राज्यों और स्थानीय निकायों पर चुनावी बदलाव लागू कराने से रोक दिया।
ओहायो, टेनेसी और टेक्सास के स्थानीय निकायों ने की थी चुनौती
यह मुकदमा ओहायो के कोलंबस, टेनेसी के नैशविल और डेविडसन काउंटी तथा टेक्सास की हैरिस, एल पासो, ट्रैविस और डलास काउंटी समेत स्थानीय सरकारों की ओर से दायर किया गया था। उनका आरोप था कि DHS और FEMA ने कांग्रेस द्वारा दिए गए अधिकारों से आगे जाकर चुनाव प्रशासन को प्रभावित करने की कोशिश की।
अदालत का फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी नियमों को लेकर संघीय सरकार और राज्यों के बीच कई कानूनी विवाद चल रहे हैं। इस मामले में अदालत ने फिलहाल यह स्पष्ट कर दिया है कि एंटी-टेररिज्म फंडिंग को चुनावी नियमों में बदलाव की शर्त से जोड़ने के लिए FEMA को कांग्रेस की ओर से पर्याप्त वैधानिक अधिकार नहीं मिला था।
