दौरे की शुरुआत 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से होगी, जहां प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-UAE व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। UAE भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और वहां लगभग 45 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा बनाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा वैश्विक हालात में होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच यह दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए पश्चिम एशिया में स्थिरता उसके लिए रणनीतिक प्राथमिकता है।
इसके बाद प्रधानमंत्री 15 से 17 मई तक नीदरलैंड में रहेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री रॉब जेटन, किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।
17 और 18 मई को प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन का दौरा करेंगे, जहां तकनीक, नवाचार और ग्रीन एनर्जी पर बातचीत होने की संभावना है। इसके बाद 18 से 19 मई को वे नॉर्वे जाएंगे। नॉर्वे के ओस्लो में 19 मई को तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें ग्रीन ट्रांजिशन, ब्लू इकोनॉमी, रक्षा, अंतरिक्ष और नई तकनीक जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।
दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 19 से 20 मई तक इटली में रहेंगे। यहां वे प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से मुलाकात करेंगे। इस दौरान भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, रक्षा सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
कुल मिलाकर यह 5 देशों का दौरा भारत की विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भू-राजनीतिक और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है।
