नई दिल्ली । बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री रेखा आज हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित और सम्मानित अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। अपनी खूबसूरती दमदार अभिनय और लंबे फिल्मी सफर के दौरान निभाए गए यादगार किरदारों की वजह से उन्होंने इंडस्ट्री में खास मुकाम बनाया है। हालांकि रेखा के लिए बॉलीवुड तक पहुंचने और अपनी पहचान बनाने का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। महज 15 साल की उम्र में हिंदी फिल्मों में कदम रखने वाली रेखा को शुरुआती दौर में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि उन्हें अपने रंग रूप और हिंदी भाषा को लेकर भी ताने सुनने पड़े थे। लेकिन उनकी पहली हिंदी फिल्म सावन भादों उनके करियर के लिए बेहद खास साबित हुई।
साल 1970 में रिलीज हुई सावन भादों में रेखा के साथ अभिनेता नवीन निश्चल मुख्य भूमिका में नजर आए थे। खास बात यह थी कि दोनों ने इसी फिल्म के जरिए हिंदी सिनेमा में बतौर लीड कलाकार शुरुआत की थी। फिल्म का निर्देशन मोहन सहगल ने किया था। रेखा ने फिल्म में चंदा नाम की एक गांव की लड़की का किरदार निभाया था जबकि नवीन निश्चल विक्रम के रोल में नजर आए थे। फिल्म की कहानी में रोमांस के साथ परिवार जमीन जायदाद और साजिश का भी तड़का देखने को मिला था।
इस फिल्म ने रेखा को पहली बड़ी पहचान दिलाई लेकिन उनकी लोकप्रियता को जिस गाने ने नई ऊंचाई दी वह आज भी पुराने हिंदी गीतों के चाहने वालों के बीच याद किया जाता है। फिल्म का गाना कान में झुमका चाल में ठुमका कमर पे चोटी लटके रेखा के शुरुआती करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस गाने को दिग्गज गायक मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी थी। रफी की आवाज और रेखा तथा नवीन निश्चल की स्क्रीन केमिस्ट्री ने गाने को बेहद लोकप्रिय बना दिया था।
गाने में रेखा का अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया। उनकी अदाएं और डांस ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और देखते ही देखते वह दर्शकों के बीच पहचान बनाने लगीं। यही वजह रही कि सावन भादों की सफलता को रेखा के शुरुआती करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। फिल्म की कामयाबी के बाद हिंदी सिनेमा में उनके लिए आगे के रास्ते खुलने लगे।
रेखा इससे पहले दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम कर चुकी थीं लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी शुरुआत ने उनके करियर को एक अलग दिशा दी। सावन भादों के बाद उन्हें लगातार फिल्मों के प्रस्ताव मिलने लगे और धीरे धीरे वह उस दौर की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। शुरुआती मुश्किलों से निकलकर रेखा ने आगे चलकर ऐसा मुकाम हासिल किया जिसे आज भी बॉलीवुड की सबसे प्रेरणादायक यात्राओं में गिना जाता है।
मोहम्मद रफी की आवाज में रिकॉर्ड किया गया यह गाना भी रेखा की शुरुआती पहचान का अहम हिस्सा बन गया। यही वजह है कि करीब 56 साल बाद भी सावन भादों और इस सुपरहिट गीत का जिक्र रेखा के फिल्मी सफर की शुरुआत के साथ जरूर किया जाता है। एक युवा अभिनेत्री के लिए यह गाना सिर्फ एक हिट गीत नहीं बल्कि उनके करियर को नई पहचान देने वाला यादगार पड़ाव साबित हुआ।
