हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके जरिए सोने के आभूषणों और दूसरी संबंधित वस्तुओं की गुणवत्ता और शुद्धता की पहचान की जाती है। ऐसे में त्योहारी सीजन में जब सोने और सोने के गहनों की खरीदारी बढ़ जाती है तब हॉलमार्किंग फीस में यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि फीस बढ़ने के बावजूद ग्राहकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि उन्हें सीधे तौर पर 30 रुपये अतिरिक्त देने का नियम नहीं बनाया गया है।
हॉलमार्किंग की नई फीस ज्वैलर्स द्वारा हॉलमार्किंग सेंटर को दी जाएगी। सरकारी नियमों के मुताबिक यह शुल्क सीधे ग्राहक से अलग से नहीं लिया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति सोने का आभूषण खरीदता है तो दुकानदार उससे हॉलमार्किंग के नाम पर अलग से 30 रुपये वसूल नहीं कर सकता। हालांकि ज्वैलर्स के पास बढ़ी हुई लागत को अपनी कीमत तय करने के दौरान शामिल करने का विकल्प हो सकता है।
ज्वैलर्स चाहें तो हॉलमार्किंग फीस में हुई अतिरिक्त लागत को खुद वहन कर सकते हैं। इसके अलावा वह इसे गहनों की मेकिंग चार्ज या अपनी ओवरऑल प्राइसिंग में शामिल कर सकते हैं। इसलिए ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि हॉलमार्किंग फीस बढ़ने का सीधा मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक के बिल में अलग से 30 रुपये जोड़ दिए जाएंगे।
नई व्यवस्था के तहत हॉलमार्किंग सेंटरों से BIS को भी निर्धारित राशि मिलेगी। सोने के प्रति आर्टिकल पर BIS को 7.50 रुपये देने होंगे। इसके लिए न्यूनतम 20 रुपये प्रति कंसाइनमेंट का प्रावधान रखा गया है। चांदी के मामले में प्रति आर्टिकल 3.50 रुपये BIS को देने होंगे और न्यूनतम 15 रुपये प्रति कंसाइनमेंट की राशि तय की गई है। इन रकम पर लागू टैक्स अलग से लिया जाएगा।
हालांकि कुछ शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कंसाइनमेंट की न्यूनतम फीस 200 रुपये ही बनी रहेगी। यानी एक कंसाइनमेंट के लिए कम से कम 200 रुपये का शुल्क देना होगा। चांदी की वस्तुओं की हॉलमार्किंग फीस भी 35 रुपये प्रति आर्टिकल पर पहले की तरह बनी रहेगी। चांदी के लिए कंसाइनमेंट चार्ज 150 रुपये निर्धारित है।
त्योहारी सीजन में सोने की खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए इन बदलावों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि हॉलमार्किंग सोने की खरीद से जुड़ी अहम प्रक्रिया है। ग्राहक आभूषण खरीदते समय बिल में सोने की कीमत मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क की जानकारी ध्यान से देख सकते हैं। वहीं हॉलमार्क वाले आभूषण खरीदने से उन्हें सोने की शुद्धता से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद मिलती है। नई फीस व्यवस्था के बाद हॉलमार्किंग की लागत ज्वैलर्स के स्तर पर बढ़ेगी लेकिन सरकारी नियमों के अनुसार इसे ग्राहक से अलग शुल्क के रूप में सीधे वसूल नहीं किया जाना चाहिए।
